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बीच सड़क पर भिड़ा ‘मुलायम परिवार’, शिवपाल समर्थकों ने अखिलेश समर्थक को गाड़ी से खींच की पिटाई

समाजवादी सेक्युलर मोर्चा गठित करने वाले शिवपाल यादव के समर्थकों की गाड़ियों का काफिला रास्ते से गुजर रहा था तभी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थक की एक गाड़ी शिवपाल समर्थकों के गाड़ियों के काफिले के बीच में आ गई। इस पर शिवपाल समर्थकों का गुस्सा भड़क उठा।

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव के साथ बैठे हुए। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी (सपा) से अलग होकर समाजवादी सेक्युलर मोर्चा तैयार करने वाले शिवापाल यादव की सियासी जंग में सड़क की लड़ाई भी शामिल हो गई। परिवार की आतंरिक कलह का असर दोनों खेमे के समर्थकों में गुस्से का ऐसा गुबार तैयार कर रही है कि वह बीच सड़क पर ही फूट रहा है। सूबे के झांसी में शिवपाल के कथित समर्थकों ने एक कथित अखिलेश समर्थक को कार से बाहर खींचकर पीटा। अखिलेश समर्थक ने किसी तरह भागकर एक मेडिकल स्टोर में घुसकर खुद को बचाया। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समाजवादी सेक्युलर मोर्चा गठित करने वाले शिवपाल यादव के समर्थकों की गाड़ियों का काफिला रास्ते से गुजर रहा था, तभी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थक की एक गाड़ी शिवपाल समर्थकों के गाड़ियों के काफिले के बीच में आ गई। इस पर शिवपाल समर्थकों का गुस्सा भड़क उठा। शिवपाल समर्थकों ने आव देखा न ताव और अपनी-अपनी गाड़ियों से उतरकर अखिलेश समर्थक को उसकी कार से खींच लिया और पिटाई शुरू कर दी।

पीड़ित शख्स की गाड़ी पर समाजवादी पार्टी का पर्चा चिपका था और पिटाई कर रहे लोगों की गाड़ियों पर शिवपाल के झंडे लगे थे। इससे चश्मदीदों को उन्हें पहचानने में देर नहीं लगी। बता दें कि इन दिनों समाजवादी पार्टी और शिवपाल के समाजवादी मोर्चे के बीच सियासी जंग जोरों पर है। अखिलेश यादव के खेमे से कई नेता शिवपाल के खेमे में जा चुके हैं। मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव भी चाचा शिवपाल के साथ कार्यक्रमों में मंच पर देखी जाने लगी हैं। समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपना समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाने वाले शिवपाल यादव काफी सक्रिय देखे जा रहे हैं और उनकी नई पार्टी को नाम भी मिल गया है।

बीते मंगलवार को शिवपाल ने बताया कि चुनाव आयोग में उनकी पार्टी का रजिस्ट्रेशन हो गया है और उसे ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया’ नाम मिला है। पिछले दिनों ऐसी खबरें भी आईं कि राज्य में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी से शिवपाल की करीबी बढ़ रही है। योगी सरकार ने शिवपाल को मायावती का बंगला आवंटित कर दिया था। आने वाले दिनों दो हिस्सों में बंटी मुलायम की राजनीतिक विरासत राज्य की सियासत में क्या परिवर्तन लाएगी, सबकी नजरें अब इसी पर टिकी हैं।

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