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अखिलेश पर शिवपाल का एक और प्रहार, बोले- एक कंस आज भी है, धर्मयुद्ध होगा

शिवपाल ने कहा, 'महाभारत धर्म युद्ध था, पांडवों ने तो अहंकारी दुर्योधन से पांच गांव मांगे थे, मैंने तो सिर्फ बड़ों का सम्मान मांगा, उसी सम्मान के लिए मैंने मोर्चे के जरिये धर्मयुद्ध का संकल्प लिया है।'

समाजवादी सेक्युलर मोर्चा प्रमुख शिवपाल यादव मे मंगलवार (11 सितंबर) को लखनऊ में इशारों-इशारों में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोला। शिवपाल सामाजिक संगठन श्रीकृष्ण वाहिनी के राज्यस्तरीय सम्मेलन में बोल रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवपाल ने सम्मेलन में कहा, ‘महाभारत धर्म युद्ध था, पांडवों ने तो अहंकारी दुर्योधन से पांच गांव मांगे थे, मैंने तो सिर्फ बड़ों का सम्मान मांगा, उसी सम्मान के लिए मैंने मोर्चे के जरिये धर्मयुद्ध का संकल्प लिया है।’ शिवपाल ने बिना नाम लिए सपा अध्यक्ष की कंस से तुलना कर दी। उन्होंने कहा, ‘कंस ने धर्म का पालन नहीं किया। बहन, बहनोई और पिता को कैद में डाल दिया। आज भी बहुत से कंस पैदा हो जाते हैं, एक कंस आज भी है।’ शिवपाल यहीं नहीं रुके और धार्मिक पात्रों के हवाले से अपने जज्बात बयां करते रहे। उन्होंने आगे कहा, ‘धर्म के रास्ते में संघर्ष तो होता ही है, मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी चौदह साल का वनवास मिला, रावण शक्तिशाली राजा था लेकिन राम से हारा और लंका भी जली, अधर्म के रास्ते पर चलने के कारण कंस भी मारा गया।’

शिवपाल ने रावण और कंस का उदाहरण देते हुए कहा कि ताकत मिलने पर अभिमान आ जाता है, उनकी हालत याद रखना चाहिए। शिवपाल के भाषण में श्रीकृष्ण के मित्र सुदामा का भी नाम आया। शिवपाल ने कहा कि उन्होंने बहुत लोगों को बहुत कुछ दिया लेकिन वे सुदामा नहीं निकले, चुनाव में उन लोगों ने ही हराने की पूरी कोशिश की। शिवपाल ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर सिलसिलेवार निशाना साधते रहे।

मुलायम सिंह यादव को लेकर उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ‘जब मैं हाईस्कूल में था, तब से नेताजी के साथ काम करने लगा था, चुनाव में 90-90 किलोमीटर साइकिल चलाकर नेताजी का प्रचार करता था, आज लोग एक घंटा साइकिल चला देते हैं तो बताते हैं कि बड़ा काम कर दिया, मैंने तो कभी राजनीति में आने का सोचा ही नहीं था लेकिन राजनीति में आना पड़ा, बड़े विभागों का मंत्री रहा, कभी कोई आरोप नहीं लगा, पुलिस भर्ती को लेकर बदनाम करने की कोशिश की गई लेकिन जिन्होंने गड़बड़ की वे वही ठग और चापलूस थे, जिन्हें मंत्री बनाया गया।’

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