बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकार को UP पुलिस ने रोका, नाराज जर्नलिस्ट ने कहा- आप हमें हमारा काम करने से नहीं रोक सकते

समाचार चैनल NDTV के पत्रकार के कैमरे को रोकते हुए जैसे ही पुलिसकर्मी बढ़े, तभी पत्रकार ने उनका विरोध किया और कहा कि मैं यहां अपना काम कर रहा हूं, आप हमें नहीं रोक सकते हैं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे VIDEO का Screengrab (Source- NDTV Youtube Channel)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को AISA ने बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान कई मीडिया संस्थानों के पत्रकार कवरेज के लिए पहुंचे थे लेकिन तभी वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने पत्रकारों को रोक दिया। यह घटना वहां मौजूद कैमरों में भी कैद हो गई। समाचार चैनल NDTV के पत्रकार के कैमरे को रोकते हुए जैसे ही पुलिसकर्मी बढ़े, तभी पत्रकार ने उनका विरोध किया और कहा कि मैं यहां अपना काम कर रहा हूं, आप हमें नहीं रोक सकते हैं। हालांकि पत्रकार के ऐसा कहने के बाद पुलिसकर्मियों ने अपने कदम पीछे कर लिए।

लखनऊ में AISA एक्टिविस्ट बड़ी संख्या में बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। एक्टिविस्टों का कहना है कि राज्य में नई भर्तियां बहुत कम आ रही हैं, जो आती भी उसके पर्चे लीक हो जाते हैं लेकिन चुनावों में राजनीतिक दल इन मुद्दों के बजाय धर्म जाति और बांटने वाली राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को रोजगार की जरूरत है न कि उन्हें बांटने की।

त्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में बेरोजगारी का मुद्दा जोर शोर से उठाया जा रहा है। सरकार जहां रोजगार के तमाम दावे कर रही है वहीं आंकड़ें दर्शाते हैं कि राज्य में रोजगार की दर पिछले 5 सालों में घटी है। वहीं लेबर पार्टिशिपेशन रेट में गिरावट देखी जा रही है।

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश सरकार इन दिनों बेरोजगारी के मुद्दे पर न सिर्फ विरोधियों के निशाने पर है बल्कि अपनी पार्टी के नेता भी सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने गुरुवार को सरकारी नौकरियों की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि देश के नौजवान कब तक सब्र करेंगे।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘पहले तो सरकारी नौकरी ही नहीं है, फिर भी कुछ मौका आए तो पेपर लीक हो, परीक्षा दे दी तो सालों साल रिजल्ट नहीं, फिर किसी घोटाले में रद्द हो। रेलवे ग्रुप डी के सवा करोड़ नौजवान दो साल से परिणामों के इंतजार में हैं। सेना में भर्ती का भी वही हाल है। आखिर कब तक सब्र करे भारत का नौजवान?’’

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