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मुस्लिम कैब ड्राइवर की हत्या, यूपी पुलिस ने नहीं किया पीड़ित के परिवार से संपर्क और कर दिया अंतिम संस्कार

परिवार ने यूपी पुलिस के ऊपर आरोप लगाया है कि शव मिलने के बाद पुलिस ने अपनी तरफ से पड़ताल करने की कोई कोशिश नहीं की और युसूफ के परिवार से भी संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की।

upतस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

राजधानी दिल्ली के सदर बाजार में रहने वाले मोहम्मद युसूफ, जो ओला ड्राइवर थे, 9 अगस्त को अपने घर से रोज की तरह अपने काम पर निकले, लेकिन उसके बाद अपने घर न लौट सके। 40 वर्षीय मोहम्मद युसूफ जब देर तक घर नहीं लौटे तब उनके परिवार ने उनकी खोजबीन करनी शुरू की और पुलिस से संपर्क किया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पड़ोसी राज्यों की पुलिस से संपर्क किया। जांच में यह सामने आया कि उत्तर प्रदेश पुलिस को मथुरा में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था और आगरा में एक टैक्सी बरामद हुई थी, लेकिन पुलिस ने शव की शिनाख्त किए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक युसूफ 9 अगस्त को एक यात्री को दिल्ली से राजस्थान के अलवर लेकर गया था, लेकिन उसके बाद वह गायब हो गया था। जब दिल्ली पुलिस ने पड़ोसी राज्यों की पुलिस से इस मामले में बात की तब 11 अगस्त को यूपी पुलिस ने मथुरा में शव मिलने की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि जो शव उन्होंने बरामद किया था उसके हाथ बंधे हुए थे और शरीर पर कई जगह चोट लगी थी। 12 अगस्त को शव की एक तस्वीर मोहम्मद युसूफ की पत्नी सलमा को दिखाई गई, सलमा ने दावा किया कि जिस शव की तस्वीर उसे दिखाई गई है वह उसके पति का ही है। युसूफ के परिवार ने यूपी पुलिस से शव की मांग की, ताकि इस्लामिक तरीके से अंतिम संस्कार किया जा सके, लेकिन तब पुलिस ने जानकारी दी की यूपी पुलिस ने 10 अगस्त को ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया था।

परिवार ने यूपी पुलिस के ऊपर आरोप लगाया है कि शव मिलने के बाद पुलिस ने अपनी तरफ से पड़ताल करने की कोई कोशिश नहीं की और युसूफ के परिवार से भी संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की। युसूफ के दोस्त अब्दुल्ला मलिक ने कहा, ‘यह हेट क्राइम से संबंधित भी कोई घटना हो सकती थी। यह बदला, चोरी जैसी घटना भी हो सकती थी, लेकिन पुलिस ने जांच नहीं की।’ आपको बता दें कि अगर पुलिस को किसी अज्ञात व्यक्ति का शव मिलता है तो नियम के मुताबिक उस शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेजने से पहले कम से कम 72 घंटे के लिए सुरक्षित रखा जाता है, उसके बाद ही अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन यूपी पुलिस ने इस गाइडलाइन को फॉलो न करते हुए युसूफ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

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