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‘पुलिसवाली मैडम’ चला रही हैं गरीब बच्चों के लिए पाठशाला

मूल रूप से हाथरस जिले की रहने वाली गुडड्न चौधरी 2016 में पुलिस सेवा में शामिल हुई थीं। उनकी तैनाती जिले के खुर्जा देहात थाने में है। गुड्डन चौधरी की कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों राहुल और दीपक ने बताया कि पुलिस वाली मैडम उन्हें पढ़ाने के लिए शाम को छह बजे आती हैं।

Author बुलंदशहर | July 13, 2019 1:38 AM
गुड्डन चौधरी की कक्षा रोजाना शाम छह बजे सड़क किनारे चलती देखी जा सकती है। वे गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के अलावा उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने की कोशिश करती हैं।

यहां के खुर्जा देहात थाने में कांस्टेबल गुडड्न चौधरी खाली वक्त में बच्चों की मुफ्त पाठाशाला चलाने और उन्हें पढ़ाने के कारण चर्चा में हैं। स्थानीय निवासियों के बीच उनके इस काम का काफी सराहना हो रही है। ‘पुलिसवाली मैडम’ के नाम से पुकारी जाने वाली गुड्डन बच्चों को पढ़ाने के साथ साथ उन्हें अपनी तनख्वाह से किताबें, कापियां भी खरीद कर देती हैं। गुड्डन चौधरी की कक्षा रोजाना शाम छह बजे सड़क किनारे चलती देखी जा सकती है। वे गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के अलावा उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने की कोशिश करती हैं। इसके लिए बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए उन्होंने कदम उठाना शुरू कर दिए हैं।

मूल रूप से हाथरस जिले की रहने वाली गुडड्न चौधरी 2016 में पुलिस सेवा में शामिल हुई थीं। उनकी तैनाती जिले के खुर्जा देहात थाने में है। गुड्डन चौधरी की कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों राहुल और दीपक ने बताया कि पुलिस वाली मैडम उन्हें पढ़ाने के लिए शाम को छह बजे आती हैं। इन बच्चों ने बताया कि पुलिस वाली मैडम पढ़ाने के अलावा उन्हें किताबें भी देती हैं। साथ ही स्कूल में दाखिला दिलाने की कोशिश भी कर रही हैं। एक बच्चे के पिता मोहर सिंह ने बताया कि वह सड़क किनारे झोपड़ी में रहते हैं।

परिवार के पास आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र न होने की वजह से उनके बच्चों को स्थानीय स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाया है। ऐसे में गुडड्न  उनके बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रही हैं। एक अन्य बच्चे की मां आशा ने कहा है कि पहचान पत्र न हो पाने की वजह से उनके बच्चे स्कूलों की पढ़ाई से वंचित हैं। गुडड्न चौधरी ने बताया कि पुलिस सेवा में शामिल होने से पहले वे अपने घर पर गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया करती थीं। उन्होंने बताया कि पुलिस सेवा में आने से पहले मथुरा में रहने के दौरान भी उन्हें गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी।

उनका कहना है कि गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने का उनका मकसद है कि जो मां बाप पैसे की कमी के चलते अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते हैं। वे उनके बच्चों को पढ़ाएं ताकि इन बच्चों का भविष्य संवर सके और यह बच्चे तरक्की करें। उन्होंने कहा कि वे अपनी तनख्वाह का लगभग तीस फीसद इन बच्चों पर खर्च करती हैं। वे यहां लगभग चार महीने से इन बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रही हैं।

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