उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के मकसद से ‘नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर’ विकसित करने का ऐलान किया है। योगी सरकार ‘वर्टिकल’ रीजनल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के इरादे से यह योजना बना रही है। इस कॉरिडोर में एक छह हाई-स्पीड वर्टिकल सड़कों का एक नेटवर्क होगा। खास बात है कि इनमें से कुछ सड़कों की शुरुआत भारत-नेपाल सीमा के पास से होगी।

अधिकारियों का कहना है कि यह कॉरिडोर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के अधिकतर प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे फिलहाल केवल प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ते हैं।

सूत्रों का कहना है कि इन प्रस्तावित स्ट्रेच को मंजूरी मिल गई है। और अगले दो साल में इन्हें पूरा किए जाने का लक्ष्य है। हाल ही में पेश हुए राज्य बजट में से 400 करोड़ इस प्रोजेक्ट के लिए दिए गए हैं।

कॉरिडोर क्यों है जरूरी?

सूत्रों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट कुल 20 जिलों में 2,340 किलोमीटर की दूरी को कवर करेगा। उत्तर में नेपाल बॉर्डर और दक्षिण में मध्य प्रदेश बॉर्डर को कवर करेगा।

गौर करने वाली बात है कि अभी यूपी में सभी बड़े एक्सप्रेसवे- यमुना एक्सप्रेस वे, लखनऊ-आगरा, पूर्वांचल और जल्द शुरू होने वाला गंगा एक्सप्रेसवे भी पश्चिम से पूर्व को जोड़ता है। लेकिन कई जिले खासकर तराई बेल्ट को ये कवर नहीं करते और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को छोड़कर यहां हाई-स्पीड रोड नहीं हैं।

सूत्रों का कहना है कि ‘नॉर्थ-साउथ’ कॉरिडोर पूरा होने के बाद यह परिस्थिति बदल जाएगा। क्योंकि यह वेस्टर्न, सेंट्रल और ईस्टर्न यूपी को कवर करेगा और उत्तर की तरफ बुंदेलखंड में भारत-नेपाल बॉर्डर के पास बने जिलों और दक्षिण में पूर्वी यूपी के हिस्सों में बनेगा।

सूत्रों ने बताया कि एक बार मौजूदा NHAI नेटवर्क से कनेक्ट होने के बाद, ना केवल यूपी के जिलों से मध्य प्रदेश के लए बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी। और रास्तों के साथ-साथ राज्य में व्यापार को फायदा होने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों को भी फायदा मिलेगा।

अधिकारियों ने कहा इन कॉरिडोर के साथ फास्ट-स्पीड ट्रेड रूट बनाना भी मुख्य मकसद है।

प्रोजेक्ट में क्या-क्या है शामिल?

इस परियोजना में नई ग्रीनफील्ड सड़कों का निर्माण करने के साथ-साथ प्रस्तावित रास्तों पर आने वाली मौजूदा सड़कों को अपग्रेड और सुदृढ़ीकरण का भी काम शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इस परियोजना की नोडल एजेंसी है और अन्य विभागों के साथ कॉर्डिनेशन करते हुए इसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने जिक्र किया कि प्रस्तावित सड़क नेटवर्क के कुछ हिस्से पहले से ही फोर-लेन हैं जिन्हें केवल सुदृढ़ीकरण या चौड़ीकरण की जरूरत है। जिन स्ट्रेच को राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में मार्क किया गया है, उनके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से मदद ली जाएगी।

प्रस्तावित रूट्स क्या हैं?

  1. 1. इकौना से प्रयागराज (Ikauna to Prayagraj)
    लंबाई: 262 किलोमीटर

भारत-नेपाल बॉर्डर के पास श्रावस्ती जिले में इकौना से प्रस्तावित यह रूट सेंट्रल यूपी के बलरामपुर, अयोध्या, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ जिलों से होकर प्रयागराज तक है।

  1. 2. कुशीनगर से ज़मानिया (Kushinagar to Zamania)
    लंबाई: करीब 200 किलोमीटर

इस रूट में बिहार बॉर्डर के पास कुशीनगर एरिया से शुरुआत होगी और यह देवरिया, दोहरी घाट, बलिया और गाज़ीपुर जिलों से गुजरेगा।

  1. 3. पिपरी से प्रयागराज (Pipari to Prayagraj)
    लंबाई: 300 किलोमीटर

भारत-नेपाल सीमा के पास पिपरी से शुरू होकर यह मार्ग सिद्धार्थनगर जिले के बांसी से होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेगा। यह बस्ती, अंबेडकरनगर, आजमगढ़ और कानपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इस रूट के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को क्रॉस करने की भी संभावना है।

  1. 4. लखीमपुर से बांदा (Lakhimpur to Banda)
    लंबाई: 500 किलोमीटर

यह कॉरिडोर नॉर्थ में लखीमपुर खीरी से लेकर बांदा (बुंदेलखंड क्षेत्र) तक जुड़ेगा। यह मध्य उत्तर प्रदेश में सीतापुर, उन्नाव और लखनऊ से होकर गुजरेगा। इसके अलावा यह हाईवे सीतापुर और नवाबगंज से भी होकर निकलेगा।

5.बरेली से ललितपुर (Bareilly to Lalitpur)
लंबाई: करीब 500 किलोमीटर
यह कॉरिडोर आगरा और झांसी से होकर गुजरेगा। रूट का एक छोर मध्य प्रदेश की सीमा को स्पर्श करेगा और इसके राजस्थान से भी जुड़ने की संभावना है।

6. मुस्तफाबाद से हरपालपुर (Mustafabad to Harpalpur)
लंबाई: करीब 500 किलोमीटर
यह सड़क पीलीभीत टाइगर रिज़र्व से प्रस्तावित है और महोबा (बुंदेलखंड क्षेत्र) को जोड़ते हुए शाहजहांपुर, औरैया, जालौन और हमीरपुर से होकर गुजरेगी।

अधिकारियों ने क्या-कुछ कहा?

11 फरवरी को राज्य विधानसभा में सालाना बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने अपने बजट भाषण में कहा था, ”राज्य बजट में ‘नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर’ पहल के तहत सड़कों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और निर्माण के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) और Uttar Pradesh Public Works Department (UPPWD) के कॉर्डिनेशन से लागू किया जाएगा। प्रस्तावित ग्रिड का उद्देश्य जिला मुख्यालयों और राज्य की राजधानी के बीच ट्रैवल टाइम कम करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में यात्री आवागमन और माल परिवहन को बेहतर बनाना है।

अधिकारी ने यह भी कहा कि लोक निर्माण विभाग (PWD) ने साल 2025-26 की अपनी सालाना वर्क प्लान में 164 किलोमीटर लंबाई के पांच सड़क सेक्शंस को अपग्रेड के लिए शामिल किया है।

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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश भर में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की हैं। इन पहलों से इंटर-सिटी ट्रैवल में बड़ा सुधार होने और इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ऐसी ही एक परियोजना है- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे। पढ़ें पूरी खबर…