उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी 15 फरवरी को समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कुछ दिन पहले ही कांग्रेस छोड़ दी थी और इसके बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में सिर्फ एक साल का वक्त बचा है, ऐसे में सवाल यह है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे बड़े चेहरे को अपने साथ जोड़ने से क्या सपा को फायदा मिलेगा?

कहा जा रहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति के कुछ और बड़े नेता भी सपा का हाथ थाम सकते हैं। नसीमुद्दीन कांग्रेस में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जैसे बड़े पद पर थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी काफी सक्रिय रहे हैं।

‘यूपी के किसानों का क्या होगा?’, योगी सरकार के बजट पर अखिलेश का निशाना

मायावती के करीबी थे नसीमुद्दीन

नसीमुद्दीन सिद्दीकी को एक वक्त में बीएसपी प्रमुख मायावती का बेहद करीबी माना जाता था। सिद्दीकी साल 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश में चली बीएसपी की सरकार में ताकतवर मंत्री थे लेकिन पिछले कुछ सालों में उनकी मायावती से अनबन हुई और उसके बाद वह पार्टी छोड़कर बाहर निकल गए।

बसपा छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस में कई साल तक रहे लेकिन उन्होंने कांग्रेस को भी अलविदा कह दिया और अब वह सपा के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जब कांग्रेस छोड़ी थी तो कई नेता भी उनके समर्थन में आ गए थे। माना जा रहा है कि यह सभी नेता सपा में शामिल होंगे।

सपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन सभी नेताओं को सपा की सदस्यता दिलाएंगे। सिद्दीकी के साथ अपना दल (सेकुलर) के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार पाल सहित कई और नेता भी सपा की साइकिल की सवारी करते हुए दिखाई देंगे।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी को अपने साथ लाकर सपा यह संदेश देना चाहती है कि मुस्लिम समुदाय के सभी बड़े नेता उसके साथ हैं। आजम खान के जेल जाने के बाद उनके बराबर सियासी कद वाला कोई बड़ा मुस्लिम नेता सपा के पास नहीं था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी में लाकर सपा इसकी भरपाई करने की कोशिश करेगी।

यह भी पढ़ें- ‘कयामत तक बाबरी नहीं बन पाएगी’