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उप्र: दिवाली में मुलायम पहुंचे शिवपाल के घर, नहीं आया अखिलेश का परिवार

दीपावली के मौके पर समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपने छोटे भाई शिवपाल यादव के 6,लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित सरकारी आवास पहुंचे। मुलायम सिंह ने यहाँ दिवाली पूजन किया हालांकि इस मौके पर अखिलेश यादव नहीं पहुंचे थे।

अखिलेश यादव, शिवपाल यादव व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव। (फाइल फोटो)

दीपावली के मौके पर समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपने छोटे भाई और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के के अध्यक्ष शिवपाल यादव के 6,लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित सरकारी आवास व दफ्तर पहुंचे। मुलायम सिंह यादव ने भाई के यहाँ दिवाली पूजन किया हालांकि इस मौके पर अखिलेश यादव नहीं पहुंचे थे। दिवाली के इस मौके पर किसी भी तरह की सियासी बयानबाजी नहीं की गयी।

दिवाली के दिन शाम होते ही मुलायम सिंह यादव एकाएक शिवपाल की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के कार्यालय पूंजा करने पहुँच गए। इस घटनाक्रम को लेकर सपा संरक्षक ने किसी भी तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी उन्होंने सिर्फ दीपावली के उपलक्ष्य में शुभकामना सन्देश दिया, साथ ही कहा कि शहर के मुकाबले गाँव में दीपावली ज्यादा धूमधाम से मनाई जाती है। सरकारों को गांवों के विकास का ध्यान रखना चाहिए। मुलायम पूरे परिवार के साथ यहाँ पहुंचे थे। उनके अलावा पत्नी साधना, बेटे आदित्य, छोटे बेटे प्रतीक की पत्नी अपर्णा आदि भी साथ ही मौजूद रहे।

दिवाली के मौके पर बड़े भाई मुलायम सिंह के घर आने पर शिवपाल ने कहा कि, “हमने अभी पूंजा की है और हमारे साथ पूरा परिवार है। हमारे साथ नेताजी भी पूंजा में शामिल हुए और मुझे आशीर्वाद भी दिया।” उन्होंने कहा कि, “हमारा सौभाय है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के कार्यालय में पहली बार पूंजा हो रही है और पहली ही पूंजा में नेताजी शामिल हो रहे है। हमे नेताजी का आशीर्वाद मिला है। नेताजी खुद ही पूंजा में शामिल होने आये थे।

सपा संरक्षक मुलायम सिंह के शिवपाल के दफ्तर जाने के बाद सियासी गलियारों में एक बार फिर से हलचल तेज हो गयी है। इसके पहले 30 अक्टूबर को भी मुलायम सिंह अचानक शिवपाल के पार्टी दफ्तर पहुंचे थे। वहां उन्होंने शिवपाल की पार्टी का झंडा भी स्वीकार किया था। हालांकि वो इसके बाद सपा दफ्तर भी पहुंचे थे। गौरतलब है कि सियासी गलियारों में शिवपाल और अखिलेश के रिश्ते चर्चा का विषय बने हुए है। पार्टी कार्यकर्ता में असमंजस की स्तिथि है क्योकि नेताजी कभी शिवपाल के खेमे में खड़े नजर आते है तो कभी अखिलेश के खेमे में।

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