उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पूर्व आईएएस अफसर दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान को लेकर अपनी बात कही है।

राजभर ने ‘आज तक’ से बातचीत में कहा, “पैसा कमा लिया होगा… आईएएस बनना आसान है, विधायक बनना बहुत कठिन है।” राजभर ने कहा कि विधायक को एक-एक आदमी के हाथ-पैर जोड़ने पड़ते हैं, उनकी बातें सुननी पड़ती हैं, उनके काम करने पड़ते हैं।

राजभर ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, “आज की तारीख में मैं देख रहा हूं कि जिसके पास पैसा हो जा रहा है वह पैसा कमाकर सीधे राजनीति करना चाहता है।”

दिव्या मित्तल ने जारी किया था वीडियो

दिव्या मित्तल ने जब आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दिया था, तब से ही यह सवाल पूछा जा रहा था कि उनका अगला कदम क्या होगा? मंगलवार को दिव्या मित्तल ने एक वीडियो जारी कर कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती।

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए मिर्जापुर जिले में जिलाधिकारी रहने के दौरान की एक कहानी भी सुनाई। उन्‍होंने बताया कि एक बार जब उनसे निरीक्षण के दौरान एक महिला ने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल की मांग की तो उनका सिर शर्म से झुक गया।

दिव्या मित्तल ने ऐलान किया कि वह किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ेंगी और अकेले चलेंगी। उन्होंने कहा, ”मेरा मकसद राजनेता बनना नहीं बल्कि पूरी राजनीति को बदलना है।”

रेवाड़ी की रहने वाली हैं मित्तल

दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए करने के बाद लंदन में नौकरी की लेकिन बाद में वह भारत लौट आईं। मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वालीं दिव्या ने कहा, ”उत्तर प्रदेश में अफसर बनकर आई थी लेकिन यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया। अब प्रदेश की मिट्टी ही मेरी कर्मभूमि है और अपनी राजनीति की शुरुआत यहीं से ही करूंगी।”

उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के रूप में अपनी आखिरी तैनाती से पहले दिव्या मित्तल संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं।

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जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जून 2023 में पहली बार ‘PDA’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उस समय इसका मतलब था ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।