उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। अब दिव्या मित्तल ने खुलासा किया है कि वह राजनीति में आएंगी। हालांकि दिव्या मित्तल ने दावा किया कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ेंगी बल्कि आम लोगों के साथ मिलकर ऐसा राजनीतिक मंच खड़ा करेंगी, जिसका आधार जनता के सवाल और उनकी समस्याओं का समाधान होगा। दिव्या मित्तल ने कहा कि मेरे इस्तीफे के बाद ही लोग जानना चाहते थे कि मैं क्या करूंगी और किसके साथ क्या शुरुआत करूंगी? उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश मेरे लिए सिर्फ एक कार्यस्थल ही नहीं बल्कि लोगों ने मुझे अपने परिवार का हिस्सा माना है।
दिव्या मित्तल ने कहा, “मैं एक अधिकारी के तौर पर उत्तर प्रदेश आई थी। यहां के लोगों ने मुझे बेटी की तरह अपनाया। ऐसे में मैं अपनी राजनीतिक यात्रा भी उत्तर प्रदेश से ही शुरू करना चाहती हूं। इस प्रदेश ने कई मौका पर देश को दिशा दी है। मैं लोगों से कहूंगी कि वह किसी एक व्यक्ति को मसीहा मानकर इंतजार ना करें बल्कि बदलाव की शुरुआत खुद करें।”
ऐसे हजारों गांव है जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है- दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल ने कहा कि मेरे लिए राजनीतिक किसी पद तक पहुंचाने का माध्यम नहीं बल्कि उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती है और अगर पहुंच भी जाती है तो सुनी नहीं जाती है। दिव्या मित्तल ने ग्रामीण क्षेत्र की सड़क और गड्ढों की समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में आज भी ऐसे हजारों गांव है जहां पर बुनियादी सुविधाओं की कमी है। दिव्या मित्तल ने कहा कि बरसात में कई गांव का संपर्क टूट जाता है और लोग वर्षों इंतजार करते रहते हैं। जिन जगहों पर सड़के बनी है, वहां गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं।
दिव्या मित्तल ने जवाबदेही का भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पता होता है कि सड़क की क्या स्थिति है और किस जगह समस्या है, लेकिन कार्यवाही में देरी होती है। उन्होंने कहा कि मैं ऐसे मामलों पर जवाबदेही की बात करना चाहती हूं और मैं सवाल पूछती रहूंगी। दिव्या मित्तल ने कहा कि आज की युवाओं के सामने अलग तरह की चुनौतियां हैं। एक छात्र कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है और पेपर लीक की घटना हो जाती है, ऐसे में उसकी मेहनत प्रभावित होती है।
AI को लेकर दिव्या मित्तल ने जताई चिंता
दिव्या मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। दिव्या मित्तल ने कहा कि AI कई तरह से काम को बदल सकता है और युवाओं के मन में रोजगार को लेकर भी सवाल पैदा हो रहे हैं। दिव्या मित्तल ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि मैं भी दो बेटियों की मां हूं और मैं भी कई बार इसकी चिंता करती हूं, लेकिन इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।
दिव्या मित्तल ने कहा कि मेरा उद्देश्य केवल एक राजनेता को बदलना नहीं बल्कि राजनीति में काम करने के तरीके में बदलाव लाना है। मेरा मानना है कि आम लोगों की समस्याएं सुनी जाए और जनता को केवल चुनावी आंकड़ों के रूप में ना देखा जाए। दिव्या मित्तल ने कहा कि मैं किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाऊंगी बल्कि जिन आम लोगों का राजनीतिक व्यवस्थाओं के जरिए समाधान नहीं हुआ है, उनके लिए मैं काम करूंगी और लोगों के साथ मिलकर मैं फैसला करूंगी।
दिव्या मित्तल ने कहा कि जैसे ही मैंने इस्तीफा दिया, कुछ ही घंटे में एक बड़े राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता ने एक ऐसी मुलाकात का जिक्र किया, जो हुई ही नहीं थी। दिव्या मित्तल ने कहा कि ऐसे पोस्ट महिलाओं को डराने की कोशिश में किए जाते हैं, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग और आरोपों के जरिए लोगों को सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
पैसे कहां से आएंगे?
दिव्या मित्तल ने बताया कि राजनीति में आने के लिए पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण की जरूरत होती है, लेकिन मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं है। दिव्या मित्तल ने चुनाव में खर्च होने वाले पैसों पर भी सवाल उठाया और कहा कि पैसा आखिर विकास से जुड़े संसाधनों से ही आता है। उन्होंने कहा कि मुझे एक पैसा नहीं चाहिए लेकिन वह पैसा सड़क, पुल और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए। दिव्या मित्तल ने कहा कि मैंने आज तक किसी की जाति, धर्म पूछ कर कोई फैसला नहीं किया है और आगे भी इसी सिद्धांत पर बढ़ूंगी।
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उत्तर प्रदेश की चर्चित आईएएस अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर हो गया है। मित्तल ने 30 अगस्त को निजी कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और नए जीवन लक्ष्यों का हवाला देते हुए प्रशासनिक सेवा से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। यहां पढ़ें पूरी खबर…
