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यूपी पुलिस के हज़ार जवान-अफ़सरों को अकेले डकैत ने तीन दिन पिलाया था पानी, जानिए कुछ ‘असली’ मुठभेड़ों की कहानी

ऐसी ही एक कहानी कुख्यात डाकू घनश्‍याम केवट की भी है। उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में संभवतः यह पहली मुठभेड़ थी जो पचास घंटों तक चली और टीवी समाचार चैनलों ने उसका लगातार सजीव प्रसारण भी किया।

Noida latest newsतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मी मारे गए हैं। वहीं 5 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए हैं। ये पहली बार नहीं है जब अपराधी और पुलिस के बीच ऐसी कोई मुठभेड़ हुई है। पुलिस की मुठभेड़ अक्सर सवालों के खेरे में आ जाती है। लोगों का मानना है ज़्यादातर मुठभेड़ सही नहीं होती और उनकी कहानियां भी लगभग एक सी होती है। लेकिन जब पुलिस और गैंग्स्टर के बीच सच में मुठभेड़ होती है तो ज़्यादातर गैंग्स्टर पुलिस पार भारी पड़ते हैं।

ऐसी ही एक कहानी कुख्यात डाकू घनश्‍याम केवट की भी है। उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में संभवतः यह पहली मुठभेड़ थी जो पचास घंटों तक चली और टीवी समाचार चैनलों ने उसका लगातार सजीव प्रसारण भी किया। चित्रकूट जिले के राजापुर क्षेत्र में एक घर के अंदर छिपे अकेले डकैत ने तीन दिन तक पुलिस को पानी पिलाया था। तीन दिन तक चली इस मुठभेड़ में दो पीएससी जवान, एक एसओजी और एक एसटीएफ़ का जवान मारे गए थे। इसके अलावा सात पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए थे।

घनश्‍याम को घर से निकालने के लिए पुलिस ने आग का सहारा लिया था। डकैत को भगाने के लिए पुलिस ने उसके छिपने की जगह में आग लगायी और जिस मकान में वह छिपा था उसको बुलडोज़र से गिराने का भी प्रयास किया गया। जिसके बाद वह घर से निकलकर गाँव के बाहर भागा। उसने कमरे का दरवाजा खोलते हुए छत पर चढ़कर नीचे लम्बी छलांग लगाई और गांव के पीछे जंगल की ओर भागा। चूंकि पुलिस ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया था ऐसे में घनश्याम जिस ओर भागा वहां भी भारी मात्र में पुलिस मौजूद थी। घनश्याम को जंगल की ओर भागते देख पुलिस ने ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार शुरू कर दी। लगभग 45 मिनट बाद जब फायरिंग बंद हुई और सन्नाटा छा गया तो डकैत घनश्याम की तलाश शुरू की गई। तलाशी के दौरान गोलियों से छलनी घनश्याम की लाश पुलिस को बरामद हुई।

वहीं 2007 में दस्यु ददुआ को मारने के बाद एसटीएफ के जवान वापस आ रहे थे। तभी फतेहगंज के बघोलन तिराहे पर अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने घेरकर उन पर गोली बसाई थी इस हमले में एसटीएफ छह जवान शहीद हो गए थे। दस्यु इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी डकैत ने इतने बड़ी तादाद में एसटीएफ के जवानों को निशाना बनाया था। वहीं तीन साल पहले डकैत गौरी यादव ने दिल्ली के एक दारोगा को मौत के घाट उतार दिया था।

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