UP Politics: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में महज 6-7 महीनों का ही वक्त बचा है। उससे पहले सत्तारूढ़ बीजेपी से लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी तक, एससी यानी अनुसूचित जाति वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपने इन प्रयासों को तेज भी कर दिया है।
मायावती के नेतृत्व वाली बसपा और चंद्र शेखर आजाद के नेतृत्व वाली आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) या एएसपी (केआर) भी चुनावों से पहले राज्य में दलितों के बीच अपने समर्थन आधार को मजबूत करने और विस्तार करने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
मेरठ में दलित छात्रा की हत्या पर बढ़ा विवाद
मई 2026 में मेरठ में एक दलित कॉलेज छात्रा की हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और 8 जुलाई को एक प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से आक्रोश और भड़क गया है और मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडे के खिलाफ कथित तौर पर मारपीट के आरोप में कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में दलितों की संख्या 21% है, और राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 84 सीटें उनके लिए आरक्षित हैं। 2022 के चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने मिलकर 63 अनुसूचित जाति की सीटें जीतीं थीं, जबकि तत्कालीन सपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को केवल 20 सीटें मिली थीं। दलित मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रभावशाली हैं।
सीएम योगी ने दिया था पीड़ितों का आश्वासन
मेरठ की दलित लड़की की हत्या के कुछ हफ्तों बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 जुलाई को गाजियाबाद के एक सरकारी गेस्ट हाउस में उसके परिवार वालों से मुलाकात की। शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और आवास देने की भी घोषणा की थी। पिछले शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सामाजिक कल्याण और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री और पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण ने मेरठ में मृत दलित लड़की के परिवार से मुलाकात की और मामले की जांच की समीक्षा की।
शुरू की थी नई योजना
अप्रैल में दलितों को शामिल करते हुए अपने सामाजिक गठबंधन को फिर से मजबूत करने के प्रयास में सीएम योगी की लीडरशिप वाली सरकार ने एक नई योजना शुरू की थी। इसके तहत 403 करोड़ रुपये की डॉ. बी.आर. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य सभी 403 निर्वाचन क्षेत्रों में अंबेडकर की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण, विकास और रखरखाव करना है।मुख्यमं त्री ने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश भर में अंबेडकर और सामाजिक न्याय के अन्य प्रतीक चिन्हों की मूर्तियों पर प्रतीकात्मक “सुरक्षात्मक छतरियां” लगाई जाएंगी।
साल 2024 के लोकसभा चुनावों में, उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से बीजेपी की सीटों की संख्या 2019 के चुनावों में 62 से घटकर 33 रह गई, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतीं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 17 सीटों में से सपा ने सात और कांग्रेस ने एक सीट जीती, जबकि बीजेपी को आठ सीटें मिलीं। शेष एक आरक्षित सीट नगीना की थी, जहां चंद्रशेखर आजाद जीते थे।
क्या है सपा की प्लानिंग?
बात अगर समाजवादी पार्टी की करें तो पार्टी चीफ अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा ने रविवार को मेरठ में “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ महारैली का आयोजन किया और अंबेडकर की विरासत पर चर्चा की। पार्टी ने आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। इस साल की शुरुआत में अखिलेश ने पहली बार बसपा संस्थापक कांशी राम की जयंती 15 मार्च को पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर मनाने का फैसला किया, जिसे उन्होंने “बहुजन समाज दिवस या पीडीए दिवस” नाम दिया था।
समाजवादी पार्टी ने कहा, “कांशी राम ने दिसंबर 1992 में महान समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के साथ हाथ मिलाया और ‘बहुजन समाज बनाओ अभियान’ को गति प्रदान की। उन्होंने दिसंबर 1993 में नेताजी (मुलायम) के नेतृत्व में दलित वर्गों की सरकार बनाने में मदद की।” एसपी सूत्रों का कहना है कि अनुसूचित जाति की सीटों के अलावा पार्टी 2027 के चुनावों में कम से कम 14 सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों को टिकट देने की योजना पर काम कर रही है, ताकि पीडीए के अपने एजेंडे को मजबूत किया जा सके।
कहां खड़ी है बसपा?
2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों दोनों में करारी हार का सामना कर चुकी बसपा को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष कर रही पार्टी की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती एक्टिव हो गई हैं। उन्होंने पिछले साल दलितों, मुसलमानों और ओबीसी के सामाजिक गठबंधन बनाने के लिए “भाईचारा समितियों” को पुनर्जीवित किया था।
बसपा ने मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन का गठन किया है, जिसमें मुस्लिम और दलित समूहों से एक-एक समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। इसी प्रकार, ओबीसी भाईचारा समिति में ओबीसी और दलित समुदायों से दो-दो समन्वयक शामिल किए गए हैं। पार्टी इन समितियों के कामकाज की मासिक समीक्षा करती आ रही है।
हालांकि, मेरठ की दलित लड़की की हत्या के विरोध प्रदर्शनों पर मायावती के रुख की चंद्र शेखर आज़ाद ने आलोचना की। चंद्रशेखर अपनी आजाद समाज पार्टी को यूपी और आस-पास के राज्यों में विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। मेरठ में हुए विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने दलितों और अन्य हाशिए पर पड़े वर्गों से संवैधानिक तरीकों से अन्याय के खिलाफ लड़ने और सड़कों पर न उतरने का आग्रह किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदान के माध्यम से राजनीतिक सशक्तिकरण ही उनके अधिकारों की रक्षा की कुंजी है। उन्होंने ASP(KR) पर स्पष्ट कटाक्ष करते हुए कहा, “कुछ संगठन और राजनीतिक दल, संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित होकर, शोषित समुदायों के सदस्यों को गुमराह करते हैं और उन्हें विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए उकसाते हैं।”
मेरठ कांड पर क्या रहा आजाद समाज पार्टी का रुख
मेरठ में हुए विरोध प्रदर्शनों पर मायावती की टिप्पणियों को लेकर चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिक्रिया काफी आक्रामक रही थी। आज़ाद मेरठ जाकर दलित पीड़ित लड़की की मां और बहन से मिले और उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस मामले को संसद में उठाएंगे। मायावती पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए उन्होंने कहा कि केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है और राजनीतिक नेताओं को पीड़ितों के परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए।
जून की शुरुआत में आज़ाद ने 2027 के चुनावों से पहले दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता परिवर्तन यात्रा शुरू की। उन्होंने चुनावों के लिए अपनी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग भी शुरू कर दी। एएसपी के नेता सौरभ किशोर ने कहा, “जब भी किसी दलित, मुस्लिम या ओबीसी के खिलाफ कोई आपराधिक घटना घटती है, तो हमारे नेता (आज़ाद) पीड़ितों और उनके परिवारों से मिलने के लिए वहां पहुंचते हैं। हाल ही में वे इसी सिलसिले में मेरठ, लखनऊ और रायबरेली गए थे,”
कांग्रेस ने भी बनाए हैं अपने समीकरण
सपा की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस ने भी दलित-ओबीसी गठबंधन पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत दिया है। पार्टी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश का कांग्रेस प्रभारी AICC सदस्य राजेंद्र पाल गौतम को बनाया है। राजेंद्र पाल गौतम एक प्रमुख दलित नेता हैं और एआईसीसी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष भी हैं।
कांग्रेस की इस पुरानी पार्टी ने कांशी राम की जयंती को सामाजिक परिवर्तन दिवस के रूप में मनाकर उनकी विरासत पर अपना दावा पेश किया। लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अगर जवाहरलाल नेहरू जीवित होते तो वे कांशी राम को कांग्रेस का मुख्यमंत्री बना देते। 20 जुलाई को कांग्रेस ने ओबीसी, दलित और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों के बीच लामबंदी करने के उद्देश्य से 20 अगस्त तक पूरे उत्तर प्रदेश में पदयात्रा और सेमिनार आयोजित करने के लिए “बहुजन विचार” अभियान शुरू किया है।
पिछले हफ्ते बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की प्रमुख सहयोगी पार्टी, एलजेपी (राम विलास) ने लखनऊ में अपनी उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की, जिसमें पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार पासी समूह के कुछ नेताओं ने एक नारा सुझाया, “क्यों मांगे उधार, जब अपना नेता तैयार।” इसके बाद चिराग पासवान ने कथित तौर पर कहा कि उनकी पार्टी सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
एलजेपी रामविलास सांसद अरुण भारती और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरेंद्र कुमार सिन्हा पिछले एक साल से उत्तर प्रदेश भर में यात्रा कर रहे हैं और विभिन्न अत्याचारों का शिकार हुए दलित परिवारों से मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में पासी समुदाय असहाय महसूस कर रहा है। दलितों पर अत्याचार होने पर एलजेपी (आरवी) उन्हें सहायता और आर्थिक मदद मुहैया कराती है। ऐसे अधिकतर मामलों में सपा नेताओं पर आरोप लगते हैं। हम मुख्यमंत्री के समक्ष भी ये मुद्दे उठाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में ग्राम स्तर पर “दलित चौपाल” का आयोजन करेगी।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बहराइच और श्रावस्ती जिले के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान योगी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में 748 करोड़ रुपए से ज्यादा की मूल्यों वाली 153 विकास परियोजना लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। पढ़िए पूूरी खबर…
