UP News: अपने वाहन के कागज यानी बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, फिटनेस या परमिट में से कोई भी अधूरा रह गया तो आपको अब चालान की मोटी चपत लग सकती है। अधूरे दस्तावेजों के साथ एक्सप्रेस-वे के टोल प्लाजा पर ई-चालान हो सकता है। उत्तराखंड और बिहार में यह तकनीक काम कर रही है और इसे यूपी में भी लागू करने की योजना है।

यूपी में एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर इस ईचालान की प्रणाली शुरुआत आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एकप्रेस वे पर शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद प्रदेश के सभी हाईवे के टोल प्लाजा पर भी यह प्रणाली शुरू हो जाएगी।

कैसे काम करता है ये सिस्टम?

टोल प्लाजा पर होने वाले ई-चालान की प्रणाली की बात करें तो ‘ई-डिटेक्शन सिस्टम सेंट्रल व्हीकल रजिस्ट्रेशन डेटाबेस से जुड़ा होता है। इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) मैनेज करता है। टोल प्लाजा पर वाहन के पहुंचते ही वहां लगे कैमरे नंबर प्लेट या फास्टैग को स्कैन करते हैं।

डेटाेबस क्रॉसचेक होगा और कटेगा चालान

जानकारी के मुताबिक, वाहनों के केंद्रीय वाहन डेटाबेस से क्रॉस चेक किया जाता है। इस प्रक्रिया में वाहन के पंजीकरण, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र व परमिट की स्थिति की भी जांच हो जाएगी। ऐसे में अगर किसी भी दस्तावेज में कमी या अवधि समाप्त मिली तो संबंधित वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर ई-चालान भेज दिया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने व नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए उठाया जा रहा है। इस मामले में उन्नाव के एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक सिस्टम है। जब वाहन टोल प्लाजा से गुजरेगा, तभी उसकी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान हो जाएगा।

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गौतमबुद्ध नगर जिले में निबंधन विभाग ने स्टांप शुल्क की चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। नोएडा में जनवरी माह में हुई बड़ी और बेशकीमती रजिस्ट्रियों की जांच के दौरान भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद विभाग ने 53 संपत्ति खरीदारों को नोटिस जारी कर दिया है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि दस्तावेजों में हेराफेरी और मिलीभगत के जरिए शासन को लगभग दो करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। यह मामला जनवरी में पंजीकृत दस्तावेजों की स्क्रूटनी और भौतिक सत्यापन के बाद सामने आया है। पढ़िए पूरी खबर…