जब एक स्कूल बनवाने की वजह से दर्ज हुआ था योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि एक सख्त राजनेता की है, कभी राजनीतिक विरोधियों पर बरसते हुए तो कभी अधिकारियों को डपटते उनके वीडियो सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं।

Yogi Adityanath
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि एक सख्त राजनेता की है, कभी राजनीतिक विरोधियों पर बरसते हुए तो कभी अधिकारियों को डपटते उनके वीडियो सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं। इस छवि के उलट उनकी एक छवि बच्चों के लिए भी है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को बाबा और महाराज के नाम भी पुकारा जाता है। लेकिन एक गांव में उन्हें टॉफी वाली बाबा के नाम से पुकारते हैं। गोरखपुर के वनटांगियां गांव के बच्चे मुख्यमंत्री को इसी नाम से जानते हैं। सीएम इन बच्चों के साथ हर साल दीवाली मनाते पहुंचते हैं। बीजेपी का दावा है कि साल 2009 से शुरू हुआ सिलसिला अभी भी जारी है।

सोमवार को योगी आदित्यनाथ जब बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करने पहुंचे तो सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में वह बाढ़ पीड़ित परिवारों के साथ साथ बच्चों से भी बातचीत करते हुए देखे गए। बच्चों से उनके प्यार के कारण ही उनके टॉफी वाले बाबा का नाम मिला है। दीवाली के मौके पर जब वह वनटांगियां जाते हैं, तो बच्चों के लिए खिलौने, पटाखों के साथ साथ टॉफी और चॉकलेट भी लेकर जाते हैं।

वनटांगिया से योगी का संबंध: अंग्रेजी शासनकाल में जब इस इलाके में रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं तो बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की गई थी। इस कटाई के बदले अंग्रेज सरकार ने साखू के पौधों के रोपण और उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों, मजदूरों को जंगल मे बसाया था। इस जंगल के लिए बर्मा देश की टांगिया विधि का इस्तेमाल किया गया था इसलिए यहां रहने वाले वनटांगिया कहलाए।

जब सीएम योगी पर हुआ था मुकदमा: यहां के लोगों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के दौरान 2009 में योगी को मुकदमा भी झेलना पड़ा था। योगी के कार्यकर्ता वनटांगिया बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट से एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर रहे थे, इस पर वन विभाग ने उसे अवैध काम बताकर एफआईआर दर्ज कर दी थी। योगी ने 2009 से वनटांगिया समुदाय के साथ दिवाली मनाने की परंपरा शुरू की थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी दिवाली पर यहां आना नहीं भूलते हैं।

2017 में जब वह मुख्यमंत्री बनें तो गांव वालों का अनुमान था कि वह अब नहीं आएंगे, लेकिन उनके पहुंचते ही गांव में बच्चों के चेहरों पर मुस्कान आ गई। भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि वह हर साल यहां आते हैं।

योगी आदित्यनाथ 1998 से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लड़ते आ रहे हैं। 1998 से लेकर 2014 तक वह लगातार जीतकर संसद पहुंचते रहे। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिणाम तक योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनाए जाने के अनुमान नहीं लगाए जा रहे थे, लेकिन एकाएक समीकरण बदले और वह सीएम की रेस में शामिल होते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंच गए।

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