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यूपी: सीएम योगी आदित्‍यनाथ व डिप्‍टी सीएम केपी मौर्य ने लोकसभा से दिया इस्‍तीफा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी ने इसकी जानकारी दी।

Author नई दिल्ली | September 21, 2017 5:36 PM
योगी के मुख्यमंत्री और केशव मौर्य के उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद से ही तय हो गया था कि दोनों को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी ने इसकी जानकारी दी। ज्ञात हो कि योगी गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद थे, जबकि केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद की फूलपुर सीट से सांसद थे। हाल ही में दोनों उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए हैं। योगी के मुख्यमंत्री और केशव मौर्य के उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद से ही तय हो गया था कि दोनों को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित नव-निर्वाचित सभी पांचों सदस्यों ने गत सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण की थी। आदित्यनाथ के अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह और अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण की थी। सुबह 11 बजे विधान भवन के तिलक हाल में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। सबसे पहले आदित्यनाथ को विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने शपथ दिलाई। उसके बाद बाकी नव-निवार्चित सदस्यों ने शपथ ली थी। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना भी मौजूद रहे।

मालूम हो कि आठ सितंबर को योगी समेत सभी मंत्री निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए थे। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के उपचुनाव में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और उनके दो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा ने विधानभवन में पांच सिंतबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। ध्यान रहे कि गत 19 मार्च को राज्य सरकार में ओहदा ग्रहण करने वाले इन मंत्रियों को शपथ लेने के छह महीने के भीतर प्रदेश विधानमण्डल के किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी था। यह अवधि मंगलवार, 19 सितम्बर को समाप्त होने वाली थी।

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