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अखिलेश यादव के समर्थकों ने खून से इस्तीफा लिख कर जताया शिवपाल के फैसले का विरोध

खून से लिखा इस्तीफा देने वाली एक महिला नेता ने कहा, "ये केवल इस्तीफा नहीं है बल्कि हमारे नेता अखिलेश यादव के प्रति हमारे समर्पण का प्रतीक है।"

अखिलेश यादव के समर्थन में प्रदर्शन करते समाजवादी पार्टी के युवा नेताओं की फाइल फोटो( पीटीआई)

समाजवादी पार्टी से जुड़े चार संगठनों के 50 पदाधिकारियों ने पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले सात सदस्यों को निकाले जाने के विरोध में सोमवार (19 सितंबर) को इस्तीफा दे दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इनमें से कुछ अखिलेश समर्थकों ने अपना त्यागपत्र खून से लिखकर दिया है। सोमवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर खुद को “अखिलेशवादी” बताने वाले सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए। खून से इस्तीफा लिखने वाली समाजवादी छात्र सभा की राज्य सचिव सपना अग्रहरी ने मीडिया से कहा, “ये केवल इस्तीफा नहीं है बल्कि हमारे नेता अखिलेश यादव के प्रति हमारे समर्पण का प्रतीक है।”

अखिलेश के आवास के बाहर तब अजीब स्थित पैदा हो गई जब वहां आए दो युवा एक बिजली के खम्भे पर चढ़ कर नारा लगाने लगे, “ये जवानी है कुर्बान, अखिलेश भैया तेरे नाम।” पुलिस ने दोनों को मुश्किल से नीचे उतारा। समाजवादी युवजन सभा के कार्यकारी समिति के सदस्य अभिषेक ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार से कहा, “अखिलेश भैया हमारे नेता हैं और हम उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करेंगे।” समाजवादी युवजन सभा के राज्य प्रमुख बृजेश यादव ने मीडिया से कहा, “मैं अखिलेशवादी हूं और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए कड़ी मेहनत करूंगा।”

प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में जारी सियासी उठापटक के बीच शिवपाल यादव ने रविवार शाम पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के भांजे और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अरविंद यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद सोमवार को शिवगोपाल ने अखिलेश के करीबी माने जाने वाले सात अन्य युवा नेताओं को भी समान आरोपों में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन नेताओं में तीन एमएलएसी और चार पार्टी के विभिन्न युवा संगठनों के प्रमुख हैं। एमएलसी सुनील सिंह यादव, आनंद भदौरिया और संजय लाठर के साथ ही यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मो. एबाद, युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष बृजेश यादव, यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव दुबे और छात्र सभा के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव पर पार्टी प्रमुख के खिलाप अपमानजनक टिप्पणी करने, पार्टी विरोध गतिविधियों में लिप्त रहने और अनुशासनहीन आचरण के लिए कार्रवाई करने की बात कही गई है। निष्कासन के बाद एमएलसी आनंद भदौरिया ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कभी भी समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ टिप्पणी नहीं की है और पार्टी के प्रति उनकी वफादारी अंसदिग्ध है।

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