UP Bypoll Election up Chunav Result 2018, Phulpur, Gorakhpur Lok Sabha Bypoll Election up Chunav Result 2018 reason-of-bjp-defeat-failure-of-yogi-magic गोरखपुर उप चुनाव: सीएम के बूथ पर मिले बस 43 वोट, नतीजों से हैरान हैं बीजेपी नेता - Jansatta
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गोरखपुर उपचुनाव: सीएम योगी आदित्यनाथ के बूथ पर बीजेपी को मिले कितने वोट? बना हुआ है सस्पेंस

गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने भाजपा के प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला को 21,881 वोटों से हरा दिया। प्रवीण निषाद को जहां 4,56,513 वोट मिले, वहीं भाजपा प्रत्याशी 4,34,632 वोट ही हासिल कर सके।

योगी आदित्यनाथ ने इन चुनावों में 16 कार्यकर्ता सम्मेलन, जनसभाएं की थी। लेकिन कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी शायद योगी की मेहनत पर भारी पड़ी। (image source- shyamlal yadav)

पिछले तीन दशकों से भाजपा के खाते में रही गोरखपुर सीट पर इस बार सपा ने जीत का परचम लहराकर सभी को चौंका दिया है। गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने भाजपा के प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला को 21,881 वोटों से हरा दिया। प्रवीण निषाद को जहां 4,56,513 वोट मिले, वहीं भाजपा प्रत्याशी 4,34,632 वोट ही हासिल कर सके। सूबे के मुख्यमंत्री के गढ़ में यह हार बीजेपी के लिए किसी सदमे से कम नहीं। योगी के आलोचक इसे सीएम की निजी हार के तौर पर पेश कर रहे हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो गई कि जिस बूथ पर सीएम ने वोट डाला, वहां बीजेपी को महज 43 वोट मिले। बीजेपी के राजनीतिक विरोधियों ने सोशल मीडिया पर इस खबर को शेयर करते हुए पार्टी पर जमकर तंज कसे। हालांकि, एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि बीजेपी को सीएम के बूथ पर 43 नहीं, बल्कि 182 वोट मिले हैं।

कहां से शुरू हुई बात:  दरअसल, सोशल मीडिया पर इस बात की खूब चर्चा रही कि योगी के बूथ पर बीजेपी को महज 43 वोट मिले। चुनावी उठापटक पर नजर रखने वाले लोगों की इस खबर पर खास नजर रही। वहीं, बीजेपी विरोधी खेमे ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर मजे लेने शुरू कर दिए। कुछ ने इसे गोरखनाथ मठ पर योगी को मिलने वाले वोट से जोड़ दिया। वहीं, कुछ ने कहा कि सीएम के बूथ पर बीजेपी से ज्यादा वोट तो कांग्रेस को मिले। एक यूजर ने तंज कसते हुए तो यहां तक लिखा कि योगी अपना घर बचाने में ही नाकाम रहे।

 

कैसे बढ़ी बात: हिंदी अखबार अमर उजाला के गोरखपुर संस्करण में 15 मार्च (गुरुवार) को पेज नंबर 4 पर खबर छपी कि जिस बूथ पर योगी ने वोट डाला, वहां बीजेपी को महज 43 वोट मिले हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने कन्या प्राथमिक विद्यालय, गोरखपुर स्थित जिस बूथ पर वोट डाला, वहां कुल 1775 वोट डाले गए। इसमें से बीजेपी को 43 वोट मिलने की बात कही गई है। वहीं, एक अन्य हिंदी वेबसाइट पत्रिका ने बीजेपी को मिलने वाले वोट से जुड़े अलग ही आंकड़े पेश किए।

अमर उजाला में छपी रिपोर्ट

पत्रिका ने यह रिपोर्ट छापी है 

हालांकि, शाम होते होते हिंदी वेबसाइट दैनिक भास्कर डॉट कॉम ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके मुताबिक, बीजेपी को 43 वोट मिलने की बात महज अफवाह है। असल में पार्टी को 43 नहीं, बल्कि 182 वोट मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, योगी ने 11 मार्च को प्राथमिक विद्यालय गोरखनाथ बूथ संख्या 250 पर वोट डाला। इस बूथ पर कुल 670 वोटर हैं। रिपोर्ट क मुताबिक, इस बूथ पर केवल 284 वोट पड़े। इसमें बीजेपी को 182, सपा को 95 जबकि कांग्रेस को 3 वोट मिले। बाकी वोट नोटा और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गया।

दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट नीचे देख सकते हैं

क्यों है शक: दरअसल, कन्फ्यूजन की स्थिति इसलिए भी है क्योंकि अमर उजाला की ही एक अन्य रिपोर्ट में इस बूथ पर वोटिंग की संख्या 15 मार्च को छपी रिपोर्ट से अलग बताई गई है। 11 मार्च को मतदान के बाद अगले दिन अमर उजाला के गोरखपुर संस्करण में एक खबर छपी। इसमें कहा गया कि योगी ने जिस बूथ संख्या 250 पर वोट डाला, उस पर महज 284 मतदाताओं ने वोट डाले। वहीं, 15 मार्च की रिपोर्ट (ऊपर स्क्रीनशॉट में देखें) में लिखा गया है कि इस बूथ पर कुल 1775 वोट पड़े हैं।  

अब 16 फरवरी को अमर उजाला गोरखपुर ने अलग रिपोर्ट छापी है। इसमें कहा गया है कि जिस मतदान केंद्र पर योगी ने वोट डाला, उस पर बीजेपी को जीत मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मतदान केंद्र पर छह बूथ थे। वहीं, वोटिंग के अगले दिन छपी रिपोर्ट (ऊपर स्क्रीनशॉट) में आठ बूथ होने की बात कही गई थी। नीचे देखें रिपोर्ट 

ज्यादा कन्फ्यूजन की स्थिति इसलिए भी है क्योंकि गोरखपुर उप चुनाव से जुड़े विस्तृत आंकड़े मीडिया में नहीं आए। दरअसल, चुनाव आयोग की इजाजत के बावजूद डीएम ने पत्रकारों को मतगणना केंद्र में घुसने नहीं दिया। बाद में आयोग ने कहा कि जिलाधिकारी खुद मीडिया को जानकारी दे रहे हैं। दावा किया गया कि गिनती के शुरुआती शुरुआती राउंड में जैसे ही सपा कैंडिडेट ने लीड लेनी शुरू की, उसके बाद ही मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन लगा दिया गया। सपा ने जिला प्रशासन पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाया। वहीं, बीजेपी ने कहा कि इस डीएम की नियुक्ति खुद पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने की थी। हालांकि, इस विवाद का एक नुकसान यह भी नजर आता है कि मीडिया रिर्पोटिंग पर रोक की वजह से गोरखपुर उप चुनाव से जुड़े विस्तृत आंकड़े सामने नहीं आ सके।

उल्लेखनीय है कि शहरी वोटरों को भाजपा समर्थक माना जाता है। लेकिन इन उपचुनावों में शहरों में वोट बेहद कम पड़े। भाजपा नेता सिर्फ कार्यालयों में बैठकर ही चुनाव की समीक्षा करते रहे और वोटरों को बूथ तक लाने में नाकाम रहे। इसी का खामियाजा भाजपा को चुनाव नतीजों में उठाना पड़ा। इसके अलावा भाजपा योगी मैजिक के भरोसे ही बैठी रही, जिससे कार्यकर्ता जमीन पर उतरकर सरकार के कामों को लोगों को समझाने में नाकाम रहे। हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने इन चुनावों में 16 कार्यकर्ता सम्मेलन और जनसभाएं की थीं, लेकिन कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी शायद योगी की मेहनत पर भारी पड़ी।

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