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यूपी: ‘अर्थी’ पर बैठ देवरिया उपचुनाव के लिए खरीद पर्चा, समर्थक लगा रहे थे ‘राम नाम सत्य है’ का नारा, जानिए कौन हैं MBA कर चुके प्रत्याशी ‘अर्थी बाबा’

अर्थी बाबा बैंकाक में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उनकी नौकरी थी, लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर अब वे खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगे।

UP by-election, Arthi baba, election nomination form, Deoria by-election, who is arthi babaअर्थी बाबा वोटरों को भगवान के बराबर दर्जा दे रहे है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया की सदर सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। जिसके लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है। यहां से “अर्थी बाबा” उर्फ राजन यादव भी अपना नामांकन करने वाले हैं। इसके लिए वह शुक्रवार को पर्चा खरीदने के लिए अर्थी पर बैठकर पर्चा लेने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे थे। अर्थी बाबा चार बार विधानसभा, तीन बार एमएलसी और तीन बार लोकसभा चुनाव में मोदी, योगी और राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन सबसे ज्यादा वह चर्चा में तब आए जब वह राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिये दावेदारी कर रहे थे। अर्थी बाबा  राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन प्रस्तावक के अभाव में पर्चा निरस्त हो गया।

अर्थी बाबा उर्फ राजन यादव 2008 में एमबीए कर चुके हैं। जानकारी के अनुसार अर्थी बाबा बैंकाक में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उनकी नौकरी थी, लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर अब वे खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगे। तीन भाइयों और दो बहनों में मझले हैं अर्थी बाबा। चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरना हो, चुनाव प्रचार करना हो, आंदोलन करना हो, सब अर्थी पर ही करते हैं। हर काम अर्थी पर ही करने के बारे में उन​का कहना था कि यही जीवन का एकमात्र सत्य है। इसे वो सत्य का प्रतीक मानते हैं। इसके अलावा वो घाट पर जलने वाली चिताओं की पूजा भी करते हैं।

अर्थी बाबा शुक्रवार को दोपहर करीब दो बजे पर्चा खरीदने अर्थी पर सवार होकर कलेक्ट्रेट गेट पहुंचे थे। इस दौरान वह अर्थी उठाने वाले अपने समर्थकों के साथ राम-राम सत्य का नारा लगा रहे थे। उनके प्रचार करने का तरीका अन्य नेताओं से अलग है। नेता जहां भारी भीड़ और लग्जरी गाड़ियों से अपना प्रचार कर रहे है तो वही अर्थी बाबा अकेले ही उपचुनाव के सियासत में उतर पड़े है। वह वोटरों को भगवान के बराबर दर्जा दे रहे है। एक आकड़े के मुताबित देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख से अधिक मतदाता ,है जहां 50-55 हजार ब्राह्मण मतदाता है। जिसको लुभाने के लिये सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा ने यह दाव खेला है।

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