UP BJP Team: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बहुत विलंब से लेकिन समुचित जातीय प्रतिनिधित्व और प्रभावशाली चेहरों से सजी अपनी नई प्रदेश कमेटी का आज ऐलान किया तो भाजपा के कमजोर पड़ते जनाधार वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सभी वर्गों में हर्ष और उमंग की लहर दौड़ गई। सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया और असर पूर्व गन्ना मंत्री और पश्चिमी के भाजपा के राजपूत चेहरे ठाकुर सुरेश राणा की नियुक्ति पर दिखा।

सहारनपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने इन नियुक्तियों पर कहा कि पार्टी नेतृत्व ने नई नियुक्तियों में सभी जातियों का समावेश किया है। किसी भी जाति को छोड़ा नहीं गया है। उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर रोहित मिश्रा को सौंपी गई है। जबकि पूर्व मंत्री और गुर्जर बिरादरी के सम्मानित नेता नवाब सिंह नागर को पश्चिम क्षेत्र का नया अध्यक्ष बनाया गया है।

पश्चिम पर खास फोकस

पश्चिम के ही सत्यपाल सैनी और शामली के युवा जाट नेता मोहित बेनीवाल उपाध्यक्ष बनाए गए। बसंत त्यागी को प्रदेश मंत्री बनाया गया। इस तरह से पार्टी ने ब्राह्मण और त्यागी समाज को प्रभावी प्रतिनिधित्व दिया है।

उन्होंने खुद को स्थान नहीं दिए जाने पर कहा कि वह पार्टी के पक्के और निष्ठावान कार्यकर्त्ता हैं। यही उनकी पहचान और यही उनका परमानेंट पता है। नोएडा से 1996 से 2007 तक भाजपा विधायक और मंत्री रहे सालीन और विनम्र स्वभाव के नवाब सिंह नागर गुर्जर को क्षेत्रीय अध्यक्ष की बागडोर सौंपी है।

उनका नाम प्रमुखता से चल रहा था और बाकी दावेदार उनका नाम सामने आने पर पहले ही मैदान छोड़ गए थे। हालांकि, नवाब सिंह नागर को यह नई जिम्मेदारी मिलने का कोई भरोसा नहीं था लेकिन पिछले एक पखवाड़े से कार्यकर्त्ता और समर्थक उन्हें अग्रिम बधाइयां दे रहे थे।

सहारनपुर मंडल में सुरेश राणा को जिम्मेदार

पश्चिम खासकर सहारनपुर मंडल को सुरेश राणा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने से अवश्य ही नई ताकत मिलेगी। वह रालोद-सपा गठबंधन के कारण पिछला विधानसभा चुनाव पहले से ज्यादा वोट लेने के बावजूद मामूली अंतर से हार गए थे। उनका पिछले चार सालों के दौरान पार्टी उनकी लगातार अनदेखी कर रही।

उनको 2024 में लोकसभा का टिकट नहीं दिए जाने से सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, कैराना सीटें हार गई थी। पार्टी नेतृत्व ने गलती में सुधार किया है। सुरेश राणा ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि वह पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं और मिली नई जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निवर्हन करेंगे।

जातीय समीकरण का भी रखा ध्यान

ध्यान रहे हाल ही में भाजपा ने अरसे बाद युवा क्षत्रिय नेता अजीत सिंह राणा (गांव खुड़ाना निवासी) को सहारनपुर जिला भाजपा का नया जिलाध्यक्ष घोषित किया था। उन्होंने एक प्रभारी और कर्मठ कार्यकर्त्ताओं का संगठन खड़ा करने का काम किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी रूप से तीन प्रमुख जातियां हैं जाट, गुर्जर और राजपूत तीनों को जिम्मेदारी मिलने से पार्टी को अवश्य ही लाभ मिलेगा।

हापुड़ के विकास अग्रवाल, मुजफ्फरनगर के संजय अग्रवाल क्षेत्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल थे। दोनों ने पार्टी के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है। इस तरह से पश्चिम के प्रमुख लोगों को संगठन में स्थान देकर पार्टी नेतृत्व ने किसी तरह के जोखिम से बचने का काम किया है।

ध्यान रहे लोकसभा चुनाव में भाजपा की भारी शिकस्त का ठीकरा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के सिर फोड़ा था। तभी यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि नया अध्यक्ष या क्षेत्रीय अध्यक्ष जाट बिरादरी से नहीं बनाया जाएगा। युवा रालोद सांसद चंदन चौहान का कहना है कि केंद्रीय मंत्री और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के कारण विधानसभा चुनाव में भाजपा-रालोद गठबंधन को जाटों का भरपूर समर्थन मिलेगा।

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पंकज चौधरी की नई बीजेपी कार्यकारिणी में जातीय संतुलन साफ तौर से दिख रहा है। ओबीसी के अंतर्गत आने वाली पाल, कुशवाहा, कुर्मी समेत अन्य जातियों के नेताओं को शामिल करके समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले की काट निकालने की कोशिश की गई है। पढ़िए पूरी खबर…