UP Politics: अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के पहले विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रमुख दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग के मुद्दे पर टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का बड़ा दावा ठोका है। वहीं कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने यह भी बता दिया है कि सीट शेयरिंग पर चर्चा कब होगी।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाते हुए कहा है कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है।

सीट शेयरिंग पर बातचीत कब करेंगे सपा-कांग्रेस

गठबंधन में सीटों के पेच पर कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि अक्टूबर महीने के भीतर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला पूरी तरह तय कर लिया जाएगा। पार्टी का मानना है कि चुनाव की तिथियां करीब आने से पहले सीटों की स्थिति साफ हो जाना जरूरी है, ताकि जिन प्रत्याशियों को टिकट मिले, उन्हें अपनी विधानसभा क्षेत्र में उतरकर जमीनी स्तर पर तैयारी करने का पूरा समय मिल सके।

‘संगठन सृजन’ अभियान और केंद्रीय नेतृत्व की नजर

कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए पिछले दो महीनों से ‘संगठन सृजन’ अभियान चला रही है। प्रदेश के एक-एक जिले के भीतर AICC और राज्य स्तर के ऑब्जर्वरों द्वारा लगभग 100-100 समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं। इस पूरी कवायद की निगरानी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल खुद कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर समानांतर तैयारी

कांग्रेस ने साफ किया है कि भले ही गठबंधन में 150 प्लस सीटों की मांग की जा रही हो, लेकिन उसकी तैयारी राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चौबीसों घंटे चल रही है। पार्टी के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर जनाधार मजबूत कर रहे हैं। 403 सीटों पर तैयारी का मुख्य उद्देश्य यह भी है कि गठबंधन होने की सूरत में जहां सहयोगी दल (जैसे सपा) चुनाव लड़ेंगे, वहां कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें जीत दिलाने में पूरी मदद कर सकें।

लखनऊ में भारी बारिश के बीच कार्यकर्ताओं का उत्साह

उत्तर प्रदेश में कार्यकर्ताओं के मनोबल को लेकर कांग्रेस का दावा है कि लोग अब बदलाव के लिए तैयार हैं। हाल ही में राजधानी लखनऊ में लगातार 4 घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ा प्रदर्शन किया। पार्टी का कहना है कि प्रदेश की जनता और वरिष्ठ नागरिक आज भी कांग्रेस के शासनकाल और उसके द्वारा किए गए विकास कार्यों को याद कर रहे हैं।

सपा के दावों पर कांग्रेस का पलटवार और ‘गठबंधन धर्म’

समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों द्वारा अकेले दम पर बहुमत लाने के बयानों पर कांग्रेस ने सधा हुआ रुख अपनाया है। कांग्रेस का कहना है कि वह ‘इंडिया’ ब्लॉक में एक जिम्मेदार साझेदार की तरह गठबंधन धर्म निभाना जानती है। हालांकि, पार्टी ने यह भी याद दिलाया कि आजादी के आंदोलन से जुड़ी कांग्रेस एक बहुत बड़ी पार्टी है और उत्तर प्रदेश का ऐसा कोई गांव नहीं है जहां कांग्रेस का झंडा उठाने वाले बुजुर्ग कार्यकर्ता मौजूद न हों।

‘राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं’

वहीं, सपा और कांग्रेस के बीच बन रहे और बिगड़ते समीकरणों पर यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुटकी ली है। राजभर ने कहा कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है और स्थितियां कभी भी बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि कौन कब किसके साथ आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, क्योंकि राजनीति में हर दल अपने नफे-नुकसान के हिसाब से फैसले लेता है।

2 जून गेस्ट हाउस कांड का जिक्र और सियासी इतिहास

अपने बयान को मजबूती देने के लिए ओम प्रकाश राजभर ने 2 जून 1995 के ऐतिहासिक ‘गेस्ट हाउस कांड’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस भयानक घटनाक्रम के बाद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कभी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक साथ आ सकती हैं। लेकिन सालों बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों धुर विरोधी दलों ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इसलिए सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर भी कुछ भी अंतिम नहीं माना जा सकता।

‘इंडिया’ ब्लॉक की रणनीति क्या?

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव केवल बीजेपी बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह विपक्षी एकता की परीक्षा भी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिली सफलता के बाद दोनों पार्टियों से कार्यकर्ताओं की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अक्टूबर में होने वाली बैठकों में 150 सीटों की दावेदारी पर क्या सहमति बनती है और ‘इंडिया’ ब्लॉक उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में किस फॉर्मूले के साथ उतरता है।

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अगले साल की शुरुआत में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रचार में जुट गई है। इसी कड़ी में सपा प्रमुख लगातार कोई न कोई घोषणा कर रहे हैं। अब अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि 2027 में अगर उनकी पार्टी जीतकर सरकार बनाती है तो वो राज्य के सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करेंगे। पढ़िए पूरी खबर…