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UP Assembly Election2017: कमल के हाशिए पर हैं वरुण

सांसद वरुण गांधी को उत्तर प्रदेश चुनावों में पार्टी के स्टार प्रचारकों में जगह न मिलने से उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को कोई आश्चर्य नहीं हुआ है।

Author सुल्तानपुर | Updated: January 25, 2017 2:00 AM
भाजपा सांसद वरुण गांधी। (फाइल फोटो)

राज खन्ना
सांसद वरुण गांधी को उत्तर प्रदेश चुनावों में पार्टी के स्टार प्रचारकों में जगह न मिलने से उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। पार्टी के स्थानीय नेताओं कार्यकर्ताओं के लिए भी इस खबर में कुछ नया नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव के प्रचार के वक्त से ही लोगों को पता है कि वरुण और नरेंद्र मोदी के बीच खासी दूरियां हैं।
वरुण के चुनाव प्रचार अभियान में मोदी के समर्थन में नारों. भाषणों में कोई जगह नहीं थी। केंद्र में भाजपा की सरकार और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरों में वरुण, मोदी अथवा उनकी सरकार की उपलब्धियों का कोई जिक्र नहीं करते।

इस बार उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी की परिवर्तन यात्रा और रैली तक में हिस्सा नहीं लिया।पार्टी के महामंत्री रह चुके वरुण को अमित शाह की टीम में जगह नहीं मिली। राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी उन्हें तवज्जो नहीं दी गई है। इस सबसे बेपरवाह वरुण के समर्थक उन्हें उत्तर प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश करते रहे। वरुण ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई के कुछ जिलों के दौरे करके अपने इस अभियान को हवा दी थी। पिछले साल जून में इलाहाबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के मौके पर उनके इस अभियान को पार्टी नेतृत्व ने नापसंद किया। इसके बाद वरुण के विभिन्न जिलों के दौरे और सर्मथकों का उन्हें यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने का अभियान थम गया।

वरुण का राजनीतिक कद भले बड़ा हो लेकिन अपनी ही पार्टी में किनारेकर दिए जाने के कारण उनके निर्वाचन क्षेत्र के भाजपाई उनसे संम्मानजनक दूरी बनाकर चलते हैं। उनके अगले चुनाव के लिए कौन सा क्षेत्र होगा इसे लेकर भी अटकलें लगती रहती हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट के दावेदारों ने इस बात का खास ख्याल रखा कि उनपर वरुण समर्थक का ठप्पा न लगे। वरुण ने 2014 में जब सुल्तानपुर को अपने निर्वाचन क्षेत्र के रूप में चुना था तो स्थानीय लोगों को लगा था कि उनका बड़ा नाम जिले के विकास और सहूलियतों के लिए काफी फायदेमंद रहेगा। लेकिन अपनी ही पार्टी और सरकार में बेगाने हो गए वरुण अब तक अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं कर सके हैं। लोग उनसे निराश हो रहे हैं और पार्टी के लोग उनकी ओर से उदासीन हैं।

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