उत्तर प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में धर्मांतरण की कोशिश पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी है। प्रदेश के राज्यपाल सचिवालय ने उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसरों में जबरन धर्मांतरण के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए ‘कट्टरपंथ-विरोधी इकाइयां’ (Anti Radicalisation Cells) स्थापित करने का निर्देश दिया है।

राज्यपाल-सह-कुलपति के कार्यालय द्वारा 29 मई 2026 को यूपी के विश्वविद्यालयों और संस्थानों के कुलपतियों और निदेशकों को भेजे गए एक पत्र में विश्वविद्यालयों से ऐसे मामलों को रोकने के लिए तत्काल उपाय लागू करने को कहा गया है।

छात्रों के धर्म परिवर्तन की कोशिश कराने की रिपोर्ट

कुलपति के विशेष कार्यकारी अधिकारी डॉ सुधीर एम बोबड़े द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि लालच या मनोवैज्ञानिक दबाव से छात्रों के धर्म परिवर्तन की कोशिशें कराने की लगातार रिपोर्टें प्राप्त हो रही हैं। पत्र में कहा गया है कि शिक्षण संस्थानों को सुरक्षित, धर्म-निरपेक्ष और शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए और ऐसे प्रयासों को समाप्त करने के लिए रणनीति अपनानी चाहिए।

पत्र में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय और संस्थागत स्तर पर कट्टरपंथ-विरोधी इकाइयों या छात्र कल्याण प्रकोष्ठों को अत्यधिक सक्रिय बनाया जाना चाहिए। इस संदेश में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि उच्च शिक्षण संस्थान न केवल ज्ञान और नवाचार के केंद्र हैं बल्कि युवाओं के नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें आगे कहा गया है कि छात्रों को भय, मानसिक दबाव या धर्मांतरण के लिए अनैतिक प्रलोभनों के माध्यम से प्रभावित करने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य, अनैतिक और कानून के विरुद्ध है।

यूनिवर्सिटीज में धर्मांतरण पर रोक लगाने के निर्देश

उपायों में से एक यह है कि विश्वविद्यालयों को मेंटर-मेंटी सत्रों के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा को शामिल करने और छात्रों को इस विषय के बारे में जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। संस्थानों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और चिंताओं पर नज़र रखने के लिए पीटीए बैठकों और अनौपचारिक बातचीत का उपयोग करें।

राज्यपाल सचिवालय ने संस्थानों को परामर्श केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया है, जहां मानसिक दबाव या प्रलोभन का सामना कर रहे छात्र गोपनीय रूप से अपनी चिंताओं की रिपोर्ट कर सकें। कैंपस में स्थित हॉस्टलों और अन्य संवेदनशील स्थानों को कड़ी निगरानी में रखा जाएगा और विश्वविद्यालयों को अनधिकृत बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने और समय-समय पर अचानक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई

पत्र में नैतिक मूल्यों, तार्किक सोच और कानूनी अधिकारों पर डिबेट और सेमिनार आयोजित करने को कहा गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि अगर कोई संगठन, समूह या व्यक्ति धर्मांतरण के प्रयासों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है तो वे तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचित करें। पत्र में कहा गया है कि ऐसे मामलों में राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह निर्देश ऐसे समय आया है जब योगी सरकार ने बार-बार कथित धार्मिक धर्मांतरण को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बताया है। वहीं, पिछले साल दिसंबर में, लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में उस समय सनसनी फैल गई थी जब यह दावा किया गया था कि उसके परिसर से एक “लव जिहाद” नेटवर्क चलाया जा रहा है। यह घटना तब हुई जब एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को जबरन धर्म परिवर्तन और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को श्री राम कथा महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मंच से लव जिहाद और भूमि अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ हमला बोला। उन्होंने लव जिहाद को लेकर जनसभा से कहा कि हमें इसके प्रति सतर्क रहना होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें