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अयोध्या में मंदिर निर्माण की मंजूरी के लिए सौंपे गए 4000 पन्नों के दस्तावेज, 200 फीट गहरी नींव के लिए मंगाई गई स्पेशल ड्रिल मशीन

ट्रस्ट ने कहा कि पुरातत्व विभाग से कोई एनओसी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ऐतिहासिक महत्व के तीन स्थानों - मणि पर्वत, कुबेर पर्वत और सुग्रीव पर्वत शहर के दक्षिणी भाग में स्थित हैं। एडीए ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने नक्शे को मंजूरी दे दी है।

Edited By Anil Kumar लखनऊ | Updated: September 6, 2020 8:24 AM
श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के सदस्य अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) को मंदिर स्थल का प्रस्तावित नक्शा सौंपते हुए। (फोटो: ट्विटर)

अयोध्या में राम के मंदिर के भूमि पूजन के एक महीने बाद इसका निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ रहा है। मंदिर के बेस पिलर से जुड़े ड्रिलिंग काम के लिए स्पेशल ड्रिल मशीनें मंगाई गई हैं।

मंदिर निर्माण के लिए गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य ने बताया कि परिसर में 200 फीट की गहराई वाले 1200 पिलर होंगे। प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार, मंदिर 161 फीट लंबा होगा। सूत्रों ने बताया कि अयोध्य में मंदिर निर्माण के लिए कंस्ट्रक्शन कंपनी लार्सन एंड टूब्रो के 50 कर्मचारी यहां पहुंचे हुए हैं। भूमि पूजन के बाद ट्रस्ट मंदिर के निर्माण कार्य से जुड़े कागजी काम, साइट का नक्शा व अन्य चीजें पूरी करने में जुटा हुआ है।

29 अगस्त को ट्रस्ट की तरफ से 4000 पन्नों के दस्तावेजों के साथ मंदिर का प्रस्तावित नक्शा अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) को सौंप दिया गया। मंदिर का नक्शा नगर आर्किटेक्चर पर आधारित है। तकनीकी वजहों से इसे ऑफलाइन दिया गया। प्रस्तावित नक्शे में 2,74,110 वर्ग मीटर या 67 एकड़ में फैले मंदिर स्थल की विस्तृत योजना शामिल है।

ट्रस्ट का दावा है कि आग और बिजली सुरक्षा से जुड़ी सभी मंजूरी अधिकारियों से ली गई है। संरचना के लिए भूकंप प्रतिरोधी उपायों के लिए भी मंजूरी दी गई है। ट्रस्ट ने एडीए को नक्शा सौंपते हुए कहा कि मंदिर अयोध्या हवाई पट्टी से 6.5 किमी दूर है, ऐसे में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा ऊंचाई प्रतिबंध का मामला नहीं बनता है।

इसी प्रकार, एडीए को सौंपे गए, ट्रस्ट ने कहा कि पुरातत्व विभाग से किसी एनओसी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ऐतिहासिक महत्व के तीन स्थानों – मणि पर्वत, कुबेर पर्वत और सुग्रीव पर्वत शहर के दक्षिणी भाग में स्थित हैं। एडीए ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने नक्शे को मंजूरी दे दी है। यह भूमि धार्मिक / मेला ग्राउंड, बाग, पर्यटक निवास या आध्यात्मिक जमीन के उद्देश्य श्रेणी में आती है।

ट्रस्ट ने एडीए को विकास शुल्क, रखरखाव शुल्क और श्रम उपकर के रूप में 2.11 करोड़ रुपये जमा किए हैं। ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने द संडे एक्सप्रेस को बताया कि नक्शे में हर निर्माण का विवरण है- प्रत्येक स्तंभ के सटीक स्थान से लेकर उसकी भार क्षमता तक। उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ से बचने के लिए, मंदिर में तीन दिशाओं में चार द्वार होंगे। चौपाल ने कहा कि मंदिर 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को संभालने के लिए पर्याप्त होगा।

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