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उन्नाव रेप पीड़िता के चाचा पर दर्ज मुकदमे रद्द करवाने पर अड़ा परिवार, अस्पताल के बाहर ही शुरू किया धरना, सरकार ने दिया ये बयान

परिजनों ने पीड़िता के चाचा के लिए पेरोल की भी मांग की थी, जिसे प्रशासन ने मंजूर कर लिया है। इससे पहले इस बीच यूपी सरकार ने पैरोल के संबंध में कोर्ट का आदेश मानने की बात कही थी।

up policeउत्तर प्रदेश पुलिस (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस-विशाल शिवस्तव)

उन्नाव रेप पीड़िता के साथ हुई कथित सड़क दुर्घटना को लेकर चौतरफा प्रदर्शनों के बीच अब परिजनों ने एक नई मांग प्रशासन के सामने रख दी है। परिजन लखनऊ में उसी अस्पताल के बाहर धरने पर बैठने गए हैं जहां पीड़िता का इलाज चल रहा है। उनकी मांग है कि जेल में बंद पीड़िता के चाचा पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। परिजनों ने पीड़िता के चाचा के लिए पेरोल की भी मांग की थी, जिसे प्रशासन ने मंजूर कर लिया है। इससे पहले इस बीच यूपी सरकार ने पैरोल के संबंध में कोर्ट का आदेश मानने की बात कही थी।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक रेप पीड़िता के चाचा को बुधवार (31 जुलाई) को सुबह से शाम तक के लिए शॉर्ट टर्म बेल दी गई है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस फैज अहमद ने उन्हें पत्नी के अंतिम संस्कार में जाने के लिए बेल दी।

परिजनों को मनाने में जुटा प्रशासनः उन्होंने चेतावनी दी है कि मांग पूरी होने तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे। बता दें कि गंभीर हालत में मौत से जिंदगी की जंग लड़ रही पीड़िता ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है। इधर ट्रॉमा सेंटर पर प्रशासन और पुलिस अधिकारी परिवार को मनाने में जुटे हैं।

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प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से की ये मांगः इस घटनाक्रम के बीच विपक्षी दलों ने सरकार की खिंचाई तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पीड़िता का हालचाल जानने के लिए लखनऊ अस्पताल पहुंचे। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी राज्य में कई जगह विरोध प्रदर्शन किए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रेप के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राजनीतिक ताकत से वंचित करने की मांग भी की।

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पीड़ित युवती ने CJI को लिखा था पत्रः एएनआई के मुताबिक रेप पीड़ित युवती सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से पहले ही इस संबंध में धमकियां देने वालों पर कार्रवाई की मांग कर चुकी है। 12 जुलाई 2019 को लिखे गए इस पत्र में पीड़िता ने लिखा था, ‘कुछ लोग मेरे घर आए और मुकदमा वापस लेने को कहा, साथ ही ऐसा न करने पर पूरे परिवार को फर्जी मुकदमों में जेल भेजने की धमकी दी गई।’

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