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सांप्रदायिक तनाव: केंद्रीय मंत्री के बेटे को बेल, रिहाई से पहले किया फेसबुक पोस्‍ट- बोलता रहूंगा जय श्रीराम

अर्जित चौबे ने पोस्ट में लिखा, "सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं...! चाहे हाथों में डालो हथकड़ी या पैरों में जंजीर... फिर भी बोलता रहूंगा जय श्रीराम।"

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित चौबे। (फाइल फोटो)

भागलपुर हिंसा में जेल भेजे गए केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित चौबे समेत आठ आरोपियों की नियमित जमानत की अर्जी प्रभारी जिला सत्र न्यायाधीश कुमुद रंजन सिंह ने सोमवार को मंजूर कर ली। इनकी जमानत का आदेश दोपहर करीब सवा बजे आया। रिहा होने से पहले ही मंत्री के बेटे अर्जित की फेसबुक वॉल पर कुछ तस्वीरों के साथ एक पोस्‍ट आई है। इस पोस्ट में अर्जित ने लिखा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं…! चाहे हाथों में डालो हथकड़ी या पैरों में जंजीर… फिर भी बोलता रहूंगा जय श्रीराम।” एसएसपी मनोज कुमार के मुताबिक, जमानत सशर्त मंजूर की गई है। प्रभारी जिला सत्र न्यायाधीश ने इन पर किसी प्रकार का जुलूस निकालने या नारेबाजी करने पर 30 दिनों की रोक लगाई है।

बता दें कि जमानत के लिए शुक्रवार को अर्जी दी गई थी, जिस पर शनिवार को सुनवाई होनी थी। मगर पुलिस केस डायरी नहीं आने की वजह से सुनवाई सोमवार तक के लिए टल गई थी। वरीय लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद साह ने इसका काफी विरोध किया। इससे पहले एसीजेएम अंजनी कुमार श्रीवास्तव की अदालत अर्जित समेत जेल में बंद नौ आरोपियों की जमानत दरखास्त खारिज कर चुकी थी। नाथनगर थाना की एफआईआर संख्या 176/18 में नौ नामजद थे। एक अनुपलाल साह की अर्जी सोमवार अदालत में नहीं दी जा सकी। बाकी आठ जिनकी नियमित जमानत सोमवार को जिला सत्र न्यायाधीश ने मंजूर की है, उनके नाम हैं- अर्जित शाश्वत चौबे, देवकुमार पांडे, प्रणव साह, अभय कुमार घोष सोनू, प्रमोद वर्मा, निरंजन सिंह, संजय भट्ट और सुरेंद्र पाठक।

ध्यान रहे कि विक्रम संवत प्रतिपदा की पूर्व संध्या 17 मार्च को बगैर इजाजत के शोभा यात्रा निकालने, भड़काऊ नारे लगाने, डीजे बजाने और दूसरे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का पुलिस ने इन पर आरोप लगाया था। बाद में पहली अप्रैल को आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी के दावे के बीच नाटकीय तरीके से अर्जित को पटना से भागलपुर लाकर एसीजेएम के सामने पुलिस ने हाजिर किया था। एसीजेएम (सप्तम) अंजनी रंजन उपाध्याय ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में विशेष केंद्रीय कारागार भेजने का आदेश दिया था। तब से ये यहां बंदी हैं। बाकी आरोपियों में से पांच को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तीन आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

एसएसपी मनोज कुमार के मुताबिक, नाथनगर थाना की एफआईआर संख्या 177/ 18 के 12 नामजद में से बचे छह आरोपियों के घर पर शुक्रवार शाम पुलिस ने इश्तेहार चिपकाया और हाजिर होने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी। इनमें से तीन ने शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इनसे पहले आत्मसमर्पण किए आरोपी शहंशाह को पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। एसएसपी ने बताया कि 17 मार्च को उपद्रव के दौरान हाथ में पिस्तौल लिए इसी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जो तीन नामजद बचे हैं, उनकी कुर्की-जब्ती के लिए कोर्ट से वारंट मांगा गया है।

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