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बंगाल दौरों को लेकर अमित शाह से पत्रकार का सवाल- आपको तो यहां ले लेना चाहिए मकान, देखें- क्या आया जवाब?

गृह मंत्री अमित शाह बोले- "सीटों के लिहाज से हम बंगाल में सबसे ज्यादा पर लड़ रहे, मगर मुझे मालूम नहीं है कि दीदी को मेरे आने से यहां क्या परेशानी है।"

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र कोलकाता | Updated: March 26, 2021 1:29 PM
bjpगृह मंत्री अमित शाह आगामी चुनाव के मद्देनजर लगातार बंगाल का दौरा करते रहे हैं। (PTI)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर इस बार भाजपा को तृणमूल कांग्रेस के सीधे प्रतिद्वंदी के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों ही दल एक-दूसरे को घेरने की कोशिशों में लगे हैं। जहां भाजपा लगातार टीएमसी को भ्रष्टाचार और हिंसा के मुद्दे पर घेर रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल चुनाव में भाजपा की एंट्री को बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा बना दिया है। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक टीवी चैनल पर खुद के बाहरी होने से जुड़े सवाल पर जवाब दिया।

एबीपी न्यूज के बंगाली चैनल में एंकर ने अमित शाह से पूछा- “बंगाल में एक कहावत है डेली पैसेंजर, यानी हर दिन एक ही जगह पर जाना। तो आपका पश्चिम बंगाल दौरा हफ्ते में कम से कम दो दिन या कभी-कभी तीन दिन भी होता है। तो आपको तो यहां एक मकान या फ्लैट खरीदना चाहिए। हम बोल सकते हैं कि देश के गृह मंत्री का घर बंगाल में है और आपके विरोधी आपको बाहरी नहीं बोल पाएंगे।”

अमित शाह ने इस सवाल पर कहा कि जहां तक बाहरी का सवाल है, तो मेरी पार्टी अखिल भारतीय पार्टी है। मेरी पार्टी स्थानीय दल नहीं है। तो मेरी पार्टी के सारे नेता तो ममता दीदी के हिसाब से बाहरी ही हो गए। तो मैं इनको इतना छोटा सवाल पूछना चाहता हूं कि जब सुभाष बाबू कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो वें गुजरात के लिए बाहरी थे क्या प्रणब दा देश के राष्ट्रपति बने तो वे मध्य प्रदेश के लिए बाहरी थे क्या? ये क्या छोटा विचार है, यह बंगाल की सोच नहीं हो सकती,ये बहुत छोटी सोच है।

अपने बंगाल दौरों के सवाल पर शाह बोले- “अगर मेरे दौरों का सवाल है, तो बंगाल में हम सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए मेरा यहां ज्यादा आना बनता है। मगर मुझे मालूम नहीं है कि दीदी को मेरे आने से यहां क्या परेशानी है।” इससे पहले एक अन्य टीवी इंटरव्यू में जब पत्रकार ने शाह से बार-बार बंगाल के दौरे पर जाने की बात कही, तो गृह मंत्री ने कहा था- यहां पर 400 सीट हैं, बाकी राज्यों में हमारे लड़ने वाली सीटों की संख्या जोड़ दें, तो 400 नहीं पहुंचता है। इसलिए बंगाल के दौरे ज्यादा हो रहे हैं।

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