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बीजेपी की पूर्व मंत्री ने चेताया- हिंसक हो सकता है किसान आंदोलन, पीएम चाहें तो एक दिन में हल संभव

किसान आंदोलन पर पार्टी के कई नेताओं ने आशंका व्यक्त की कि प्रदर्शन हिंसक रूप ले सकते हैं। अगले महीने होने वाले स्थानीय चुनाव भी इससे प्रभावित होंगे।

Author Translated By Ikram लुधियाना | January 24, 2021 7:39 AM
narendra modi Laxmi Kanta Chawlaतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (पीटीआई फोटो)

केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ आंदोनलकारी किसानों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता विफल रहने के बाद पंजाब भाजपा में बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी को डर है कि इसका असर आगामी निकाय चुनाव में बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। इस पर दिग्गज नेत्री और भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मी कांत चावला कहती हैं कि आंदोलन इतने लंबे समय तक नहीं चलते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहें तो एक दिन में इस समस्या का हल संभव है। बता दें कि किसान आंदोलन पर पार्टी के कई नेताओं ने आशंका व्यक्त की कि प्रदर्शन हिंसक रूप ले सकते हैं। अगले महीने होने वाले स्थानीय चुनाव भी इससे प्रभावित होंगे।

पूर्व मंत्री चावला (78) ने संडे एक्सप्रेस से कहा- भाजपा नेत्री नहीं बल्कि एक भारतीय नागरिक की तरह कह रही हूं कि कोई भी विरोध प्रदर्शन इतने लंबे समय तक नहीं चलना चाहिए। जल्द इसका हल निकाला जाना चाहिए। दिसंबर के मध्य तक ठंड या आत्महत्या के चलते प्रदर्शन स्थल पर मृतकों की संख्या 30 तक पहुंच गई थी। मैंने खुद पीएम मोदी को लिखा कि अगर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर समस्या का समाधान करने में सक्षम नहीं हैं तो प्रधानमंत्री को खुद इसे देखना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा- किसानों ने इतने लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद भी शांति सुनिश्चित कर दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है। किसान 100 फीसदी गलत नहीं हैं और ना ही कृषि कानून हैं। ऐसे में खुद पीएम को किसानों के साथ बैठकर समस्या का हल निकालना चाहिए। मुझे लगता है कि अगर पीएम चाहें तो एक दिन में समस्या का समाधान निकल सकता है।

वहीं राज्य के स्थानीय नेता ने नाम ना बताने की शर्त पर राज्य भाजपा इकाई पर केंद्रीय नेतृत्व को विरोध प्रदर्शन की असली तस्वीर दिखाने में विफल रहने का आरोप लगाया। नेता ने कहा- पहली बात ये कि विरोध के बावजूद कृषि अध्यादेशों को संसद में पारित किया गया। इसके बावजूद पार्टी नहीं समझ सकी कि किसान के बीच गुस्से के कारण अकाली ने 27 साल पुराना गठबंधन तोड़ लिया। इन सबके ऊपर किसानों ने अक्टूबर में रेल रोके और अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू किया। मगर केंद्रीय नेताओं के साथ उनकी पहली बैठक 13 नवंबर को हुई। अन्नदाताओं के दिल्ली पहुंचने के बाद दस दौर की वार्ता हो चुकी हैं मगर पंजाब में 6 जून से 26 नवंबर तक विरोध प्रदर्शन के बीच सिर्फ एक बैठक हुई।

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