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ट्विटर को नागवार लगा संघ विचारक का ‘इस्लामिक पाकिस्तान’

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर सोशल मीडिया के प्रबंधक भी नजर रखे हुए हैं।

Author नई दिल्ली | May 6, 2017 12:33 AM
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर सोशल मीडिया के प्रबंधक भी नजर रखे हुए हैं।

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर सोशल मीडिया के प्रबंधक भी नजर रखे हुए हैं। और आरोप यह है कि आभासी कूटनीति में पाकिस्तान का पलड़ा भारी किया जा रहा है। इन आरोपों का आधार बना संघ विचारक राकेश सिन्हा के ट्विटर खाते का तात्कालिक निलंबन। सिन्हा के पाकिस्तान से जुड़े ट्वीट को आपत्तिजनक मान कर ट्विटर ने उसे डिलीट करवाया तो सिन्हा के समर्थकों का गुस्सा भी इसी ट्विटर पर फूटा। उनके समर्थकों ने कहा कि हम फेसबुक और ट्विटर के उपभोक्ता तो हैं लेकिन हमारे अधिकार व्यक्तिपरक हैं। मुफ्त में मुहैया कराए गए इस सार्वजनिक मंच पर एक खास विचारधारा पर हमला किया जा रहा है। इसके साथ ही सवाल उठाए गए कि क्या अपने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए हमें समानांतर स्वदेशी सोशल मीडिया बनाना पड़ेगा?

संघ विचारक और शिक्षाविद राकेश सिन्हा ने ट्वीट किया था, ‘हम पाकिस्तान नहीं इस्लामिक पाकिस्तान को तहस-नहस करेंगे’। सिन्हा का आरोप है कि ट्विटर के प्रबंधकों को पाकिस्तान के साथ इस्लामिक शब्द जोड़ना नागवार लगा और उन्होंने मेरा खाता निलंबित कर दिया। सिन्हा ने बताया कि मुझसे कहा गया कि मैंने ट्विटर के कायदों का उल्लंघन किया है। बारह घंटों तक मेरे खाते को निलंबित रखने के बाद मुझे चेतावनी देते हुए इसे बहाल किया। गौरतलब है कि सिन्हा का यह ट्वीट डेढ़ लाख बार री-ट्वीट किया गया था और इसे डेढ़ हजार पसंदगी (लाइक्स) मिले थे। सिन्हा ने कहा कि ट्वीटर की ओर से उन्हें चेतावनी जारी की गई है कि अगर ऐसे ट्वीट जारी रखे तो मेरा खाता स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।
प्रोफेसर सिन्हा का कहना है कि पाकिस्तान के आधिकारिक नाम में ही इस्लामिक (इस्लामिक रिपब्लिक आॅफ पाकिस्तान) शब्द जुड़ा हुआ है।

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औपचारिक मौकों पर भारत के लिए भी रिपब्लिक आॅफ इंडिया का इस्तेमाल होता है। अगर इस्लामिक शब्द पाकिस्तान की संवैधानिक पहचान का हिस्सा है तो फिर उसके इस्तेमाल से किस बात की आपत्ति? सिन्हा कहते हैं कि मैं ट्वीट करते वक्त सारे मानदंडों का पालन करता हूं, किसी तरह की असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं करता हूं। तो क्या मेरे विचारों पर आपत्ति सिर्फ मेरी विचारधारा के कारण है? उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया सहित कोई भी सार्वजनिक संस्था तानाशाही नहीं चला सकती है। वे दोहरे मानदंडों के साथ नहीं चल सकती हैं। व्यक्तिपरक फैसले को लागू नहीं कर सकती है।

राकेश सिन्हा आरोप लगाते हैं कि आज के समय में सोशल मीडिया का मंच ‘अलजजीरा’ की तरह काम कर रहा है। भारत विरोधी बातों से जुड़े ट्वीट पर इसे कोई आपत्ति नहीं होती है। क्या ट्विटर ने कभी उन ट्वीट को डिलीट करवाया है जिसमें मुझे या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को गाली दी जाती है। सिन्हा कहते हैं कि इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यमों पर सऊदी अरब का निवेश बढ़ा है, इसलिए उस पर एक खास तरह की विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के क्षेत्र में नवसाम्राज्यवादी मंचों को खारिज कर हमें अपना वैकल्पिक मंच तैयार करना होगा।

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