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पानी के इस्तेमाल को लेकर कानून पर विचार कर रही सरकार : उमा

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि सरकार ऐसे कानून पर विचार कर रही है जिसके तहत देश में नदियों और भूमिगत जल के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान तय किए जाएंगे..

Author इंदौर | December 20, 2015 23:36 pm
लोकसभा में उमा भारती।

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि सरकार ऐसे कानून पर विचार कर रही है जिसके तहत देश में नदियों और भूमिगत जल के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान तय किए जाएंगे। उमा ने शनिवार को कहा, ‘नदियों और भूमिगत जल के इस्तेमाल के पैमाने तय करने के लिए देश में एक कानून जरूरी है। हम इस सिलसिले में एक समिति गठित कर नीदरलैंड और बांग्लादेश के कानून-कायदों का अध्ययन कर रहे हैं’।

उन्होंने बताया, ‘हम इस बात की संभावनाएं तलाश रहे हैं कि क्या राज्य सरकारों की सहमति से ऐसा कोई कानून बनाया जा सकता है जिसके जरिए तय किया जा सके कि नदियों और जमीन से कितना पानी निकाला जाए। इसके साथ ही, नदियों में किस तरह पानी छोड़ा जाए’। उमा ने कहा, ‘संविधान के मुताबिक पानी राज्यों का विषय है। लिहाजा, हम राज्य सरकारों की सहमति लेकर ही पानी के उपयोग को लेकर कोई कानून बनाना चाहते हैं’।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उनका स्पष्ट मत है कि प्रदूषित पानी के इलाज के बाद इसे नदियों में नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि इसका फिर से उपयोग किया जाना चाहिए। उमा ने बताया कि उनके मंत्रालय ने ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत सरकार के मंजूर 20,000 करोड़ रुपए का फिलहाल इस्तेमाल नहीं किया है और दूसरे कोषों से गंगा की सफाई और संरक्षण किया जा रहा है।

उमा ने कहा, ‘गंगा एक विशेष नदी है। मेरा विचार है कि क्यों न पूरा वैश्विक समुदाय गंगा की सफाई और संरक्षण की खातिर आर्थिक मदद के लिए आगे आए। अगर ऐसा होता है, तो हम नमामि गंगे योजना के तहत मंजूर किए गए 20,000 करोड़ रुपए सरकार को लौटा देंगे’।

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे अगले साल ‘सिंहस्थ’ मेला लगना है। साधु-संतों ने इस धार्मिक मेले से पहले क्षिप्रा में प्रदूषण को लेकर नाराजगी जताई है। इस बारे में पूछे जाने पर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, ‘क्षिप्रा को साफ करने का पूरा दायित्व राज्य सरकार है। मैं इस सिलसिले में राज्य सरकार की किसी भी गतिविधि में न तो सीधे दखल नहीं दूंगी और न ही कोई मध्यस्थता करूंगी’।

उमा ने हालांकि कहा कि अगर राज्य सरकार क्षिप्रा की सफाई के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगती है तो इस सिलसिले में उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं सिंहस्थ 2016 को लेकर कोई नजरिया जाहिर नहीं करूंगी। साल 2004 में पिछले सिंहस्थ के वक्त मैं मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री थी और सिंहस्थ मेला खत्म होने के बाद ही उज्जैन पहुंची थी। इस बार भी मैं सिंहस्थ मेला खत्म होने के बाद ही उज्जैन जाऊंगी’।

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