scorecardresearch

सुप्रीम कोर्ट से उद्धव को राहत मिलने के आसार कम, जानिए कमलनाथ सरकार के गिरने की पूरी कहानी

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा है। वहीं शिवसेना इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।

सुप्रीम कोर्ट से उद्धव को राहत मिलने के आसार कम, जानिए कमलनाथ सरकार के गिरने की पूरी कहानी
एकनाथ शिंदे और सीएम उद्धव ठाकरे (दाएं) (-फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे के बीच, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा है। शिवसेना राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की डिप्टी स्पीकर की कार्रवाई पर 11 जुलाई तक रोक लगा दी है। इसी का हवाला देते हुए उद्धव ठाकरे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। सुप्रीम कोर्ट में सुने जा चुके पूर्व के ऐसे मामलों को देखकर उद्धव सरकार को राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। 2020 में मध्य प्रदेश में तत्कालीन कमलनाथ सरकार को पार्टी के विधायकों की बगावत का सामना करना पड़ा था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।

इस घटनाक्रम में बाद में कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा था और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई थी। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की स्थिति तकरीबन एक जैसी है, फर्क ये है कि बागी विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। हालांकि, उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कहा है कि उद्धव सरकार अल्पमत में आ गई है।

मध्य प्रदेश में, मार्च 2020 में कमलनाथ सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्यपाल ने सीएम कमलनाथ को बहुमत साबित करने को कहा था। इस पर कमलनाथ सरकार ने तर्क दिया था कि विधायकों की अयाेग्यता का मामला स्पीकर के पास लंबित है ऐसे में गवर्नर फ्लोर टेस्ट का आदेश कैसे दे सकते हैं। लेकिन कमलनाथ सरकार की इस दलील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अप्रैल 2020 में शिवराज बनाम स्पीकर के मामले में कहा था कि विधायकों पर अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने के कारण फ्लोर टेस्ट को रोका नहीं जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि फ्लोर टेस्ट को रोकने की जरूरत नहीं है, क्योंकि स्पीकर ने विधायकों के इस्तीफे और संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक, दलबदल के मामले पर फैसला नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि यह जानने के लिए फ्लोर टेस्ट कराना आवश्यक है कि सीएम और उनके मंत्रि परिषद के पास बहुमत है या नहीं।

27 जून को 16 बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट मेंं याचिका दायर कर अयोग्यता के नोटिस रद्द करने की मांग की थी। इस पर सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने अंतिम आदेश आने तक फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने इससे इनकार कर दिया। वहीं, कोर्ट ने यथास्थिति से छेड़छाड़ होने पर अदालत आने की बात कही थी। शिवसेना की सारी उम्मीदें अब इसी पर टिकी हैं।

पढें राज्य (Rajya News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट