पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार राज्य में यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लाने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर राज्य मंत्री शंकर घोष ने कहा कि यह बिल राज्य में पेश किए जाने वाले सबसे अहम विधयकों में से एक है।

इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा है कि सरकार यूसीसी को सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए राज्य में लागू करेगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यूसीसी को लेकर सरकार गुजरात और असम जैसे भाजपा शासित राज्यों की प्रक्रिया का अनुसरण करेगी।

मंत्री शंकर घोष ने कहा, “यूसीसी पश्चिम बंगाल में पेश किए जाने वाले सबसे महत्वपू्र्ण विधयकों में से एक है। राज्य सरकार ने सोमवार को यूसीसी बिल पेश करने का फैसला किया है। साथ ही उत्तराखंड जैसे दूसरे राज्यों ने पहले ही यह विधेयक पास कर दिया है। बिहार और कुछ अन्य राज्यों ने भी इसी तरह का विधेयक विधानसभा में पेश किया है। इसलिए यह सरकार की ओर से उठाए गए ऐतिहासिक कदमों में से एक है।”

एक समुदाय को निशाना बनाना चाहते हैं- वृंदा करात

यूसीसी को लेकर सीपीआई (एम) की नेता वृंदा करात ने कहा, “हमें ड्राफ्ट को देखना होगा, लेकिन आम तौर पर, जहाँ भी हमारी पार्टी ने दूसरी जगहों पर पेश किए गए UCC प्रस्तावों का अध्ययन किया है, हमें महिलाओं के लिए कोई वास्तविक फायदा नहीं दिखा।”

आगे कहा, “हमने स्टडी करके देखा है कि इसमें महिलाओं के लिए कुछ नहीं है, यह बस एक समुदाय को निशाना बनाना चाहते हैं। वैसे भी अभी तीन तलाक गैर-कानूनी है, तो उसमें ऐसी कोई बात है ही नहीं। अगर यूसीसी लाना है तो हम समझते हैं और लॉ कमीशन की राय यह है कि हमारे देश में इतनी विभिन्नता है इस कारण अभी यूसीसी की न तो हमें जरूरत है औ न ही इसे प्रभावी ढंग से लागू करना मुमकिन है। और यह इसलिए सच साबित हो रहा है कि सरकार खुद कर रही है कि अभी आदिवासियों को इसमें नहीं ला सकते हैं।”

सीपीआई एम नेता ने कहा, “आप (सरकार) शुरू से यूनिफॉर्म (एकसमान) बोल रहे हैं,लेकिन कह रहे हैं कि आदिवासियों को इसमें नहीं ला सकते। क्रिस्चियन की अपनी पर्सनल लॉ है, उसमें आप क्या लागू करेंगे? हिंदू में जहां ज्वाइंट फैमिली की सुविधा, उसको क्या आप छुएंगे? इसमें भी आप हस्ताक्षेप नहीं करेंगे तो कहां यूनिफॉर्मिटी है? आप केवल और केवल एक एजेंडा लागू करना चाहते हैं।”

यह भी पढ़ें: MP के यूनिफॉर्म सिविल कोड में क्या खास, इसी मानसून सत्र में विधेयक पेश करेगी मोहन सरकार

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। अगर मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक लाया जाता है, तो उत्तराखंड के बाद यह दूसरा भाजपा शासित राज्य होगा जो यह बड़ा कदम उठाएगा। पूरा खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें