अश्विनी कोष्टा कभी भी महज मध्य प्रदेश के जबलपुर की एक आम लड़की बनकर नहीं रहना चाहती थी। वह दुनिया देखना चाहती थी और अपने तरीके से जीना चाहती थी। लेकिन दो साल पहले पुणे में पोर्श कार ने अश्विनी व उसके दोस्त को टक्कर मार दी जहां दोनों की मौत हो गई। अश्विनी के पिता ने कहा,”उसकी थोड़ी आगे बढ़ने की इच्छा थी, वह बहुत मेहनती थी और हम उसका पूरा साथ देते थे। उसने मुझसे कहा था कि वह पुणे जाएगी और फिर सिंगापुर चली जाएगी।”
24 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्विनी कोष्टा 18-19 मई 2024 की रात कल्याणी नगर में अपने दोस्तों के साथ देर रात की डिनर पार्टी से लौट रही थी, तभी वह हाईप्रोफाइल पोर्श हादसा हुआ। अश्विनी कोष्टा अपने दोस्त और सहकर्मी अनीश अवधिया की बाइक पर पीछे बैठी थी, तभी नशे में धुत एक नाबालिग लड़के ने अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से उन्हें टक्कर मार दी। अश्विनी कोष्टा की मौके पर ही मौत हो गई और अनीश अवधिया की भी इस एक्सीडेंट में जान चली गई थी।
आरोपी पिता के जमानत से नाखुश हैं सुरेश
सुरेश कोष्टा सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपी के पिता को जमानत देने के फैसले से भी नाखुश हैं। मामले में नाबालिग के परिवार के बाकी सदस्य भी जमानत पर बाहर हैं। इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि अदालत में मुकदमा कब शुरू होगा।
सुरेश ने कहा, “मुझे लगता है कि ऐसा अपराध जिसमें नशे में धुत कोई तेज रफ्तार कार चला रहा हो और उसमें दो लोगों की मौत हो जाए, वह एक घिनौना अपराध माना जाता है। हमारी बेटी तो चली गई। हम तो मर-मर के दो साल से जी रहे हैं कि शायद आज या कल हमें न्याय मिलेगा।” सुरेश इस मामले में ऐसा फैसला चाहते हैं कि जो इस भयानक हादसे का अंत सही कर दे।
अभी तक नहीं शुरू हुआ ट्रायल
सुप्रीम कोर्ट के मामले की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हुए दो माह बीत चुके हैं, फिर भी अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। सुरेश ने कहा कि जिस पल उन्होंने अपनी बेटी को मुखाग्नि दी तब से ही वे इंतजार कर रहे हैं। वे हिट-एंड-रन के सभी मामलों से जुड़े खबरें पढ़ते रहते हैं। उन्होंने कहा, “जबलपुर के अखबारों में हर दिन सड़क हादसों के कम से कम सात मामले छपे होते हैं।”
परिवार ने अश्विनी कोष्टा मेमोरियल फाउंडेशन की स्थापना की है, जो जरूरतमंद बच्चों को भोजन, कपड़े और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराता है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा अश्विनी से कड़ी मेहनत करने को कहता था। मैं उसके कहता था अगर तुम्हें आगे बढ़ना तो मेहनत करो।”
फाउंडेशन के लिए नहीं मांगते चंदा
सुरेश ने कहा, “अश्विनी ने 10वीं और 12वीं क्लास में बहुत अच्छे नंबर लाए, लेकिन उसके पास जश्न मनाने का समय नहीं थी। वह अपने अगले लक्ष्य की तैयारी में लगी थी। मुझे लगता है कि मैं अपनी बेटी को कुछ भी नहीं दे पाया। इस फाउंडेशन के जरिए हम गरीब बच्चों को सामान दे रहे हैं। शायद उनके आशीर्वाद से उसे अगले जन्म में सारी खुशियां, शांति और समृद्धि मिले।” सुरेश इस फाउंडेशन के लिए किसी से चंदा नहीं मांगते वे खुद ही अपनी पेंशन से पैसे उसमें डालते हैं।
सुरेश कोष्टा याद करते हुए कहते हैं कि उनकी बेटी ने वादा किया था कि जिस दिन वे रिटायर होंगे, उस दिन वे पार्टी करेंगे। लेकिन उसके एक माह पहले ही अश्विनी की मौत हो गई। सुरेश ने कहा, “जब बच्चों को नौकरी मिलती है, तो माता-पिता को आजादी का एहसास होता है। अब बच्चे कमा सकते हैं, मजे कर सकते हैं और अपनी मर्जी से जी सकते हैं। यह दुखद घटना ठीक उसी समय हुई, जब अश्विनी उस मुकाम पर पहुंची थी।”
आगे सुरेश ने कहा, वह हमेशा से खुद का बिजनेस शुरू करना चाहती थी। हमेशा की तरह, उन्होंने उसे अपना बेस्ट देने को कहा था और उन्हें भरोसा था कि वे 100 प्रतिशत उसके साथ खड़े रहेंगे।
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गुजरात के कच्छ जिले से हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां सड़क निर्माण में कथित लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हो गया। जानकारी अनुसार 9 मई की रात ग्रामीण कच्छ में सड़क पर ड्रेनेज लाइन डालने के लिए खोदे गए लगभग 15 फीट लंबे गड्ढे में एक कार और दो बाइक गिर गईं। अलग-अलग हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक महिला भी शामिल है जिसने कुछ घंटे पहले ही भुज के जीके जनरल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
