दिल्ली सरकार ने हाल ही में राजधानी के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में दो नए विशेष चिकित्सा पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में गायनोकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी फेलोशिप और संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में फैमिली मेडिसिन में डीएनबी प्राइमरी पाठ्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। लेकिन इसी बीच लोक नायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में पहले से संचालित पाठ्यक्रमों का भविष्य अनिश्चित है।
स्वास्थ्य विभाग ने कार्यकारी आदेश के तहत न्यूरोसर्जरी और न्यूरोएनेस्थीसिया के दो-दो छात्रों को जीबी पंत अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया। इस निर्णय के बाद एलएनजेपी में संचालित एमसीएच न्यूरोसर्जरी और डीएम न्यूरोएनेस्थीसिया पाठ्यक्रम आगे भी संचालित रहेंगे या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
नाराज छात्र अदालत पहुंच गये हैं
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, छात्रों का यह स्थानांतरण दिल्ली विश्वविद्यालय के मानकों के विपरीत किया गया। एलएनजेपी में पहले से अध्ययनरत छात्र और संकाय संसाधनों की कमी के कारण असंतुष्ट थे। छात्रों ने पाठ्यक्रम में शामिल होने के कुछ समय बाद ही संसाधनों और संकाय की कमी का हवाला देते हुए इसे छोड़ने के लिए अदालत का रुख किया।
अदालत में दिल्ली सरकार ने अपनी फजीहत से बचने के लिए 6 फरवरी 2026 को एलएनजेपी के दोनों पाठ्यक्रमों के छात्रों को जीबी पंत अस्पताल में माइग्रेट करने के आदेश दिए।
सूत्रों का कहना है कि इस तरह छात्रों को स्थानांतरित करने का अधिकार दिल्ली सरकार के पास नहीं था और पाठ्यक्रम से संबंधित दिल्ली विश्वविद्यालय को भी इस मामले में भरोसे में नहीं लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तकनीकी स्थानांतरण करना था, तो यह जीबी पंत के बजाय एलएनजेपी के संबद्ध मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) में होना चाहिए था।
संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में फैमिली मेडिसिन में डीएनबी प्राइमरी पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी के बीच, एलएनजेपी में पहले संचालित डीएनबी आपातकालीन पाठ्यक्रम पिछले वर्ष संकाय स्थानांतरण के कारण बंद हो गया था। इस वजह से नए पाठ्यक्रम और सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि छात्रों का स्थानांतरण किया गया है तो यह निर्धारित दिशानिर्देशों और अदालत के आदेश के तहत ही हुआ होगा। उन्होंने विभाग से दस्तावेज मंगवाकर मामले की जानकारी लेने का आश्वासन भी दिया।
‘संसाधनों की कमी से असंतुष्ट थे छात्र’
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, छात्रों का यह स्थानांतरण दिल्ली विश्वविद्यालय के मानकों के विपरीत किया गया। एलएनजेपी में पहले से अध्ययनरत छात्र और संकाय संसाधनों की कमी के कारण असंतुष्ट थे। छात्रों ने पाठ्यक्रम में शामिल होने के कुछ समय बाद ही संसाधनों और संकाय की कमी का हवाला देते हुए इसे छोड़ने के लिए अदालत का रुख किया। अदालत में दिल्ली सरकार ने अपनी फजीहत से बचने के लिए 6 फरवरी 2026 को एलएनजेपी के दोनों पाठ्यक्रमों के छात्रों को जीबी पंत अस्पताल में माइग्रेट करने के आदेश दिए।
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दिल्ली सरकार ने राजधानी के तीन प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को एकीकृत कर एम्स की तर्ज पर स्वायत्त संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय खासकर गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी), दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान (डीएससीआई) और राजीव गांधी अतिविशिष्ट अस्पताल (आरजीएसएसएच) को लेकर लिया गया है। इसके अलावा सरकार मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) को भविष्य में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान-2 (निमहंस-2) के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम करेगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
