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TRP Scam: मुंबई पुलिस पर गरजे अर्नब गोस्वामी, बोले- ‘माफी मांगो परमबीर सिंह.. झूठा आरोप लगाओगे, बोलोगे TRP गलत है’, देखें Video

मुंबई पुलिस इन आरोपों पर अब रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने उनके विरुद्ध गलत दावे किए हैं।

Republic tv, Arnab Goswami
अर्नब गोस्वामी (फाइल फोटो)
मुंबई पुलिस ने टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का गुरुवार (8 अक्टूबर, 2020) को पर्दाफाश किया और कहा कि इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। टीआरपी के आधार पर यह फैसला किया जाता है कि कौन सा टीवी कार्यक्रम सबसे ज्यादा देखा गया। यह दर्शकों की पसंद और किसी चैनल की लोकप्रियता भी बताता है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने कहा कि एक राष्ट्रीय टीवी चैनल (रिपब्लिक टीवी) भी टीआरपी गिरोह में शामिल है। इस चैनल द्वारा सुशांत सिंह राजपूत के मामले में मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की गई थी। टीआरपी गिरोह का पर्दाफाश करने वाली मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने दो मराठी चैनलों के मालिकों को दर्शकों की संख्या की रेटिंग से छेड़छाड़ करने के लिए गिरफ्तार किया है।

मुंबई पुलिस इन आरोपों पर अब रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने उनके विरुद्ध गलत दावे किए हैं। क्योंकि उनके चैनल ने सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जांच में पुलिस पर सवाल खड़े किए थे। चैनल ने कहा है कि वह मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के विरुद्ध आपराधिक मानहानि का मुकदमा करेगा।

गोस्वामी ने एक वीडियो जारी कर कहा, ‘माफी मांगो परमबीर सिंह। झूठा आरोप लगाओगे। कहोगे टीआरपी गलत है। चैनल को बंद कर दूंगा। मैं मुंबई का दादा हूं। मैं जो मन में आए करूंगा। अर्नब गोस्वामी को पुलिस स्टेशन ले जाऊंगा।’ उन्होंने आगे कहा कि सिंह को माफी मांगनी चाहिए और अदालत में मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

इधर मुंबई पुलिस कमिश्नर सिंह ने कहा कि इन चैनलों के बैंक खातों की जांच भी की जा रही है और टीआरपी गिरोह के लिए जिम्मेदार लोगों को पुलिस पूछताछ के लिए तलब कर रही है। उन्होंने कहा, ‘विज्ञापन देने वाले इन टीआरपी रेटिंग के आधार पर इन चैनलों पर विज्ञापन प्रसारित करने के लिए पैसे देते थे और यह खेल हजारों करोड़ रुपए का है।’

उन्होंने कहा कि छेड़छाड़ की हुई टीआरपी रेटिंग्स से विज्ञापन देने वालों को दर्शकों की गलत संख्या बताई जाती थी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार टीआरपी के गलत आंकड़े दिखाकर सैकड़ों करोड़ रुपए का चूना लगाया जा रहा था। कुछ घरों के गोपनीय समूह में टीवी चैनल देखे जाने के आधार पर टीआरपी की गणना की जाती है।

सिंह ने कहा कि गिरोह में शामिल लोग इन घरों के लोगों को घूस देकर उनसे कहते थे कि वे टीवी पर कुछ चैनल चलाकर छोड़ दें, भले ही वह उसे देख न रहे हों। उन्होंने कहा कि ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च कॉउंसिल (बीएआरसी) भारत में टीवी चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग जारी करता है और इस मामले के संबंध में उनके अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है।

उन्होंने कहा कि टीआरपी को मापने के लिए मुंबई में दो हजार मापक इकाई स्थापित हैं। सिंह ने कहा कि बीएआरसी ने ‘हंसा’ नामक एजेंसी को इन इकाइयों पर नजर रखने का ठेका दिया था। पुलिस आयुक्त ने कहा कि दोनों चैनल के मालिकों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया और वे मुंबई पुलिस की हिरासत में हैं। उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत गिरफ्तार किया गया है। (एजेंसी इनपुट)

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