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त्रिपुरा: माकपा के मुखपत्र का रजिस्‍ट्रेशन रद्द, वामदलों और बीजेपी में बढ़ा टकराव

समाचार पत्र में दिए गए संपादक, प्रिंटर और प्रकाशक की जानकारी और रजिस्ट्रार न्यूजपेपर ऑफ इंडिया को दिए गए डेटा में मेल नहीं है। पीआरबी अधिनियम के उल्लंघन के लिए दैनिक देशर कथा के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी।

सीपीएम ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। साथ ही कहा है कि पार्टी के माउथपीस को रजिस्ट्रार न्यूजपेपर ऑफ इंडिया ने टारगेट बनाया है।

त्रिपुरा में सीपीएम मुखौटा डेली देशर कथा का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। रजिस्ट्रार न्यूजपेपर ऑफ इंडिया द्वारा बंगाली दैनिक समाचार पत्र का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। सीपीएम ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। साथ ही कहा है कि पार्टी के माउथपीस को रजिस्ट्रार न्यूजपेपर ऑफ इंडिया ने टारगेट बनाया है। आपको बता दें कि पुस्तक अधिनियम, 1867 के कथित तौर पर उल्लंघन करने के लिए त्रिपुरा में सीपीआई (एम) के मुखपत्र दैनिक देशर कथा के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई है। अगस्त में पश्चिम त्रिपुरा जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) संदीप नामदेव महात्मा ने कहा, “पीआरबी अधिनियम के उल्लंघन के लिए दैनिक देशर कथा के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। एक जांच के बाद, मुझे शिकायत में कुछ मिला। साथ ही सुनवाई में भाग लेने के लिए समाचार पत्र को नोटिस जारी करने की बात भी की थी।”

डीएम ने शिकायतकर्ता के नाम का खुलासा करने से इनकार कर दिया था, उन्होंने कहा था कि आरोप कई मुद्दों पर आधारित थे, जिनमें समाचार पत्र में दिए गए संपादक, प्रिंटर और प्रकाशक की जानकारी और रजिस्ट्रार न्यूजपेपर ऑफ इंडिया को दिए गए डेटा में मेल नहीं है। हालांकि, आरोपों को खारिज करते हुए संपादक समीर पॉल ने कहा था कि उन्हें डीएम के कार्यालय से कोई सूचना नहीं मिली है और दिशा निर्देशों के अनुसार ही पेपर प्रकाशित किया गया है। मुझे नहीं पता कि इस शिकायत के पीछे क्या इरादा है। यदि आवश्यक हो तो हम कानूनी लड़ाई का सामना करने के लिए तैयार हैं।

दूसरी तरफ, शिकायत का स्वागत करते हुए बीजेपी के प्रवक्ता मृणाल कांती देब ने कहा था कि सीपीआई (एम) और उसके मुखपत्र दोनों ने लोगों को धोखा दिया है। हम अंतिम फैसले का इंतजार करेंगे। त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष तपस डे ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि घोषणा में बदलाव विज्ञापन दिशानिर्देशों के साथ समायोजित करने के लिए किए गए थे। सरकार को मीडिया विकास को संरक्षित करना होगा। पेपर बहुत शुरुआत से हमारे लिए रहस्यमय दिखाई दिया। सच अब बाहर आना चाहिए।”

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