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त्रिपुरा में कांग्रेस को बड़ा झटका, बचे 10 में से केवल 3 विधायक

विधायकों ने विधानसभा स्‍पीकर रामेन्‍द्र नाथ को पत्र सौंपकर पार्टी बदलने की जानकारी दी है। अब सदन में कांग्रेस के सिर्फ 3 विधायक ही रह गए हैं।
Author अगरतला | June 7, 2016 15:00 pm
सुदीप रॉय सरकार (FILE PHOTO)

त्रिपुरा में कांग्रेस के लिए राजनैतिक संकट गहरा गया है। मंगलवार को विधानसभा के 6 कांग्रेस विधायकों ने स्‍पीकर को पत्र सौंपकर खुद को कांग्रेस पार्टी से अलग कर लिया है। उन्‍होंने तत्‍काल प्रभाव से टीएमसी की सदस्‍यता ग्रहण करने की बात भी पत्र में लिखी है।

कांग्रेस छोड़ने वालों में त्रिपुरा के पूर्व सीएम समीर रंजन बर्मन के बेटे सुदीप रॉय बर्मन का नाम भी शामिल है। समीर भी पहले कह चुके हैं कि वह रमजान के बाद टीएमसी ज्‍वाइन करेंगे। इसके अलावा आशीष कुमार साहा, दिलीप सरकार, प्रणजीत सिंह रॉय, दिबा चंद्र हरंगख्‍वाल और बिश्‍व बंधु सेन ने भी कांग्रेस को अलविदा कहकर टीएमसी की सदस्‍यता ले ली है। विधायकों ने मंगलवार को स्‍पीकर को पत्र सौंपकर इस बात की जानकारी दी। इसके पूर्व सोमवार पार्टी के वरिष्‍ठ नेता जितेन सरकार ने भी कांग्रेस से इस्‍तीफा दे दिया था।

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इससे पहले त्रिपुरा के पूर्व मुख्‍यमंत्री समीर रंजन ने कहा था कि पार्टी राज्‍य में वामपंथी दलों के साथ कैसे लड़ सकती है, जबकि अन्‍य राज्‍यों में कांग्रेस के साथ उसका गठबंधन है। कांग्रेेस के बागी विधायकों के टीएमसी में शामिल होने के साथ ही वह मानिक सरकार के नेतृत्व वाली वामदलों की सरकार की सबसे बड़ी विपक्षी बन जाएगी।

वर्तमान में, मानिक की सरकार 60 सदस्‍यों वाली विधानसभा में 50 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत में है। कांग्रेस के 3 विधायक हैं और वही सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है।

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कांग्रेस के लिए, देश के कई राज्‍यों की तरह त्रिपुरा में भी संकट खड़ा हो गया है, जहां बीजेपी आगे बढ़ रही है। 2013 के चुनावों में, 50 में से 49 सीटों पर BJP उम्‍मीदवारों की जमानत जब्‍त हो गई थी। लेकिन पिछले 12 महीनों में हुए तीनों उप-चुनावों में पार्टी ने खुद को दूसरी पायदान पर बनाए रखा है। कांग्रेस जिसने 2013 में 36.5 प्रतिशत वोट बटोरे थे, तीनों उप-चुनावों में उसके उम्‍मीदवारों की जमानत तक जब्‍त हो गई।

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