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त्रिपुरा के प्रलय का मुड़े हाथों के संग हुआ था जन्‍म, अब पैरों से लिख रहा अपनी किस्‍मत

प्रलय एक दिव्यांग है। उसके हाथ सही ढंग से काम नहीं करते। लेकिन, उसकी यह कमजोरी उसके जोश और इच्छा-शक्ति के आड़े नहीं आती। प्रलय 10वीं की परीक्षा दे रहा है और पैर से ही अपने प्रश्न-पत्र हल कर रहा है। अध्यापक भी मानते हैं कि वह एक कुशाग्र बुद्धि वाला मेहनती छात्र है।

Author March 16, 2019 12:39 PM
प्रलय जब पैदा हुआ तब उसके दोनों हाथ मुड़े हुए थे। लेकिन, उसकी यह कमजोरी उसकी हौसलों के आड़े नहीं आई। आज प्रलय पैरों से लिखकर बोर्ड परीक्षा दे रहा है। उसकी समझ और लगन की अध्यापक भी बड़ाई करते हैं। (एक्सप्रेस फोटो/ Debraj Dey)

हर साल की तरह त्रिपुरा बोर्ड के तहत चंद्रपुरा हायर सेकेंड्री स्कूल का माहौल कक्षा 10वीं की परीक्षा के चलते काफी व्यस्त है। लेकिन, इस बार स्कूल में कुछ नया हो रहा है। यहां कुछ ऐसा हो रहा है, जिसे स्कूल के प्रधानाध्यापक बादल चक्रवर्ती ने अपने 32 साल के करियर में आज तक नहीं देखा। माताबरी हाईस्कूल का छात्र प्रलय दे भी यहां तमाम छात्रों के साथ परीक्षा दे रहा है। 17 साल के प्रलय का हाथ वैसा नहीं है, जैसा सभी का होता है। दिव्यांग होने के चलते वह किसी भी चीज को अपने हाथों से पकड़ नहीं सकता है। लेकिन, उसकी यह बेबसी उसके मार्कशीट में देखने को नहीं मिलती। क्योंकि, हाथ के बजाय वह अपने पैरों से लिखता है।

प्रलय कहता है, “मुझे कोई कमी महसूस नहीं होती। मेरी मां और मेरे अध्यापक मुझे अच्छे से पढ़ाते हैं। मैं शत-प्रतिशत बेहतर करने की कोशिश करता हूं। मैं दिन में दो घंटे अपने पैरों से लिखने की प्रैक्टिस करता हूं। मैं पैरों से लिखने में सहज हूं।

स्कूल के हेडमास्टर चक्रवर्ती कहते हैं, “मुझसे कहा गया कि वह बेंच पर बैठकर नहीं लिख सकता। इसलिए मैंने अलग से लकड़ी का दूसरा प्लेटफॉर्म दिया, जहां वह बैठक सके और आसानी से लिख सके। मैंने उसके (प्रलय) लिए एक विशेष निरीक्षक भी नियुक्त किया है। चक्रवर्ती प्रलय की राइटिंग और विषय की प्रति उसकी समझ की भी सराहना करते हैं, “उसकी लिखावट की गति और समझदारी की बात करना बेहद जरूरी है। पहले दिन मैं उसके बगल में 30 मिनट तक खड़ा रहा और उसे लिखते हुए देखता रहा। छात्र (प्रलय) दिव्यांग है, लेकिन वह बहुत ही कुशाग्र बुद्धि और अपनी इस परिस्थिति को अपने साहस और सफलता से परास्त करने वाला है।”

प्रलय के पिता सुजान कुमार दे एक दिहाड़ी मजदूर हैं। परिवार के खाने-पीने का ज्यादातर खर्च उसकी मां पुतुल गुहा दे उठाती हैं। पुतुल आंगनवाड़ी में काम करती हैं। 9000 की उनकी सैलरी से प्रलय की स्कूल फीस, उसकी बड़ी बहन की कॉलेज फीस और परिवार का खर्च चलता है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में प्रलय की मां उस दिन के बारे में बताती हैं, जब वह पैदा हुआ था और उसे डॉक्टरों ने उनको दो दिन तक नहीं दिखाया। वह कहती है, “पैदा होने के बाद डॉक्टर और नर्स दो दिनों तक उसे मेरे पास नहीं लाए। जब मैंने उसे पहली बार देखा तो बेहोश हो गई। उसके दोनों हाथ उसके शरीर के पीछे मुड़े हुए थे।” पुतुल कहती हैं, “उसके पिता को लगता था कि यह लड़का कभी भी कुछ सीख नहीं पाएगा और इसकी कोई भी मदद नहीं करेगा। मैं भी काफी चिंतित थी। लेकिन, जब मैंने उसे पढ़ाना शुरू किया तो पाया कि प्रलय तुरंत सीखने वाला लड़का है।”

त्रिपुरा बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन के डेप्यूटी सेक्रेटरी प्रदीप सेनगुप्ता ने कहा कि बोर्ड प्रलय के हालातों से वाकिफ है। उन्होंने कहा, “हमने उसका वीडियो क्लिप देखा है और उसके स्कूल से इस संबंध में पूछताछ भी की है। प्रलय दे एक होनहार छात्र है और उसका शैक्षणिक प्रदर्शन कमाल का है। मुझे बताया गया कि वह आगे चलकर एक कॉलेज टीचर बनना चाहता है। अगर वह अपने लक्ष्य को हासिल करता है, तो मुझे काफी खुशी होगी।” सेनगुप्ता बताते हैं कि दिव्यांग छात्रों के लिए परीक्षा में अतिरिक्त समय और उनकी मांग पर जरूरी चीजें मुहैया कराई गई हैं। लेकिन, प्रलय कभी भी अतिरिक्त समय नहीं लेता है। वह अपने पैरों से लिखता है और अपने समकक्ष छात्रों को कड़ी टक्कर देने की कोशिश करता है।

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