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Tripura, Nagaland, Meghalaya में कौन दर्ज करेगा जीत? जानिए पिछली बार कैसा था BJP-कांग्रेस का प्रदर्शन

तीनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के लिए जीत हासिल करना इस लिहाज से भी जरूरी है कि इसका असर लोकसभा चुनावों में उनके प्रदर्शन पर दिखेगा।

Tripura, Nagaland, Meghalaya में कौन दर्ज करेगा जीत? जानिए पिछली बार कैसा था BJP-कांग्रेस का प्रदर्शन
दक्षिण त्रिपुरा जिले के सबरूम में एक रैली के दौरान त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और भाजपा सांसद बिप्लब देब के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। (पीटीआई)

Assembly Elections 2023 In North-East States: पूर्वोत्तर राज्यों के त्रिपुरा (Tripura), नागालैंड (Nagaland) और मेघालय (Meghalaya) में होने जा रहे इस बार के चुनावों में भाजपा (BJP) 2018 में हासिल बढ़त को बनाए रखने के लिए लड़ती दिखाई देगी। भाजपा त्रिपुरा में सत्ता में है, जबकि नागालैंड में यह नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) के साथ और मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। तीनों विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च में समाप्त होने वाला है, जिसमें प्रत्येक में 60 सदस्य हैं। त्रिपुरा में 16 फरवरी को और मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को मतदान (Voting) होगा। वोटों की गिनती (Counting) दो मार्च को होगी।

एक नजर पिछले चुनावों पर और अब क्या दांव पर लगा है:

नगालैंड (Nagaland)
पिछले चुनाव में यहां नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (NDPP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मिलकर चुनाव लड़ा था। भाजपा ने अभूतपूर्व 12 सीटें जीतीं, एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बने।

इस साल, राज्य में फिर से नगा राजनीतिक मुद्दे के लंबे समय से प्रतीक्षित अंतिम समाधान की छाया में चुनाव होगा। इसी उम्मीद में यहां की सभी पार्टियों ने 2021 में हाथ मिलाकर यूडीए का गठन किया था।

नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF), जो कभी राज्य में सत्ता में थी, ने घोषणा की है कि वह अकेले और एनडीपीपी-बीजेपी गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ेगी। 2018 की तरह, एनडीपीपी-बीजेपी दोनों दलों ने चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा की है, जिसमें भाजपा 20 सीटों पर और एनडीपीपी शेष 40 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।

2018 में जीती सीटें और वोट शेयर:
एनपीएफ – 26 (38.78%)

एनडीपीपी – 17 (25.30%)

बीजेपी – 12 (15.31%)

निर्दलीय – 1 (4.28%)

जद (यू) -1 (4.49%)

मेघालय (Meghalaya)
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और भाजपा के बीच दरार है। 2018 के चुनाव में, संगमा की पार्टी को भाजपा और क्षेत्रीय दलों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन उसने 60 में से 53 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ा। भाजपा के ईसाई विरोधी होने की धारणा को दूर करना मुश्किल हो गया है, असम पुलिस की विशेष शाखा द्वारा एक पत्र सामने आने के बाद समुदाय की गलतफहमी और मजबूत हो गई है, जिसमें भाजपा शासित असम में स्थानीय पुलिस थानों से धर्मांतरण और राज्य में चर्चों की संख्या पर जानकारी मांगी गई थी।

राज्य में भाजपा के खिलाफ सबसे मुखर विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) है, जो मेघालय में एक नई पार्टी है। नवंबर 2021 में, पूर्व मुख्यमंत्री और छह बार के विधायक मुकुल संगमा के नेतृत्व में 17 मौजूदा कांग्रेस विधायकों में से 12 इसमें शामिल हो गये। लोकप्रिय नेता मुकुल संगमा पार्टी की मदद कर सकते हैं, खासकर गारो हिल्स के अपने गृह क्षेत्र में, जो 60 सदस्यीय विधानसभा में 24 विधायक भेजता है।

2018 में जीती सीटें और वोट शेयर:
बीजेपी – 2 (9.63%)

कांग्रेस – 21 (28.50%)

हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HSPDP) – 2 (5.35%)

एनपीपी – 19 (20.6%)

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी – 6 (11.61%)

खुन हाइनीवट्रैप राष्ट्रीय जागृति आंदोलन – 1 (0.9%)

त्रिपुरा (Tripura)
वाम मोर्चे के 25 साल के शासन को समाप्त करते हुए, भाजपा पहली बार 2018 में राज्य में सत्ता में आई थी। 14 मई, 2022 को एक अचानक बदलाव में, भाजपा ने बिप्लब देब को हटा दिया और अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण माणिक साहा को मुख्यमंत्री के रूप में लाया। कांग्रेस और सीपीआई (एम) एक साथ लड़ाई करने की कोशिश कर रहे हैं, और दोनों के बीच गठबंधन की बात बढ़ रही है, जबकि 2021 में बनी आदिवासी टिपरा मोथा पार्टी बीजेपी की सहयोगी आईपीएफटी के आदिवासी वोटों को छीन सकती है। टिपरा मोथा चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।

2018 में जीती सीटें और वोट शेयर:
भाजपा – 35 (43.59%)

सीपीआई (एम) – 16 (42.22%)

आईपीएफटी – 8 (7.38%)

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First published on: 18-01-2023 at 07:32:13 pm
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