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बंगालः यू-टर्न बाद TMC में शताब्दी को बड़ी जिम्मेदारी, बनीं उपाध्यक्ष, ऐसा रहा है सफर

बता दें बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे पहले खबरें आई थीं कि रॉय पार्टी से नाखुश हैं। वह दिल्ली आ सकती हैं और BJP में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इस अटकल का उन्होंने खुद ही खंडन किया।

Shatabdi Roy, TMC, West Bengalनई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में TMC नेत्री शताब्दी रॉय। (Express Photo by Anil Sharma)

Trinamool Congress (TMC) ने बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय को बड़ी जिम्मेदारी दी है। रविवार को उन्हें टीएमसी में पश्चिम बंगाल इकाई का उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।

बता दें कि बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस से कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। पार्टी में भागम-भाग के दौर के बीच खबरें आई थीं कि रॉय पार्टी से नाखुश हैं। वह दिल्ली आ सकती हैं और BJP में शामिल हो सकती हैं।

दरअसल, रॉय ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि उनके संसदीय क्षेत्र में चल रहे पार्टी के कार्यक्रमों के बारे में उन्हें नहीं बताया जा रहा है और इससे उन्हें ”मानसिक पीड़ा” पहुंची है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, रॉय के बीरभूम जिला टीएमसी प्रमुख अनुव्रत मंडल से मतभेद थे। असंतोष जताने के बाद सूबे में सत्तारूढ़ पार्टी ने स्थिति काबू करने को उनसे साधा था।

हालांकि, इस अटकल का उन्होंने खुद ही खंडन किया। टीएमसी चीफ और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक से भेंट के बाद उन्होंने कहा था कि वह अपने दल के साथ हैं। कहीं नहीं जा रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी में ही बने रहने के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

loksabhaph.nic.in पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पांच अक्टूबर 1969 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित अगरपारा में जन्मीं रॉय बीए पास हैं। वह खुद को फिल्म आर्टिस्ट, कवियत्री, लेखिका, प्रड्यूसर, डायरेक्टर और कारोबारी मानती हैं। वह शादीशुदा हैं। मृगांक बनर्जी से उनका विवाह एक मई, 2000 को हुआ था। दोनों के एक बेटा और एक बेटी है।

रॉय, बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अदाकारा रही हैं। 1980 के दौर में बंगाली सिनेमा में शताब्दी का सिक्का चलता था। उन्होंने इसके अलावा फिल्मों का निर्देशन भी किया। दो बार बीजेएफए सम्मान भी पा चुकी हैं।

हालांकि, बाद में उन्होंने राजनीति का रुख किया। बांग्ला फिल्म उद्योग में एक सफल करियर के बाद रॉय राज्य में वाम मोर्चा सरकार के अंतिम वर्षों में राजतनीति में आ गई थीं। वह साल 2009 से बीरभूम की सांसद हैं। उन्होंने इसी साल में आम चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी, जबकि आगे 2014 और 2019 में भी उन्हें विजय हासिल हुई थी।

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