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Babri Masjid demolition case: दो हफ्ते में आदेश जारी करे उत्तर प्रदेश सरकार

विशेष न्यायाधीश से शीर्ष अदालत ने कहा है कि वे नौ माह के अंदर इस मुकदमे का फैसला सुनाएं। अदालत ने स्पष्ट किया था कि 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल केवल इसी मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने के लिए है। सेवा विस्तार के बाद भी वे इलाहाबाद हाई कोर्ट के प्रशासनिक नियत्रंण में बने रहेंगे।

ram mandirसुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर सुनवाई जारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1992 के बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की लखनऊ में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ाने के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को दो हफ्ते के अंदर आदेश जारी करने के लिए कहा। इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती आरोपी हैं। न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन व न्यायमूर्ति सूर्य कांत के पीठ ने कहा कि इस मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने 27 जुलाई को एक नया पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने अपने लिए सुरक्षा मुहैया कराए जाने सहित पांच अनुरोध किए हैं।

पीठ ने राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ऐश्वर्या भाटी को इन सभी पांच अनुरोधों पर दो हफ्ते के अंदर विचार करने का निर्देश दिया और कहा कि ये आग्रह तर्कसंगत प्रतीत होते हैं। अदालत ने 19 जुलाई को विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल इस मुकदमे की सुनवाई पूरी होने व फैसला सुनाए जाने तक बढ़ा दिया था। बहरहाल, राज्य सरकार को इस संबंध में आदेश जारी करना है जो उसने अब तक नहीं किया है।

विशेष न्यायाधीश से शीर्ष अदालत ने कहा है कि वे नौ माह के अंदर इस मुकदमे का फैसला सुनाएं। अदालत ने स्पष्ट किया था कि 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल केवल इसी मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने के लिए है। सेवा विस्तार के बाद भी वे इलाहाबाद हाई कोर्ट के प्रशासनिक नियत्रंण में बने रहेंगे। बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती आरोपी हैं। इन तीनों के अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार व साध्वी ऋतंभरा पर भी 19 अप्रैल, 2017 को षड्यंत्र के आरोप लगाए थे।
इस मामले में तीन अन्य रसूखदार आरोपियों गिरिराज किशोर, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल और विष्णु हरि डालमिया की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई और उनके खिलाफ कार्यवाही रोक दी गई।

शीर्ष अदालत ने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, जिनके उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते विवादित ढांचे को गिराया गया था, के बारे में कहा था कि उन्हें इस संवैधानिक पद पर रहने के दौरान मुकदमे से छूट है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल, 2017 में मामले की रोजाना सुनवाई कर दो साल में मुकदमे का निपटारा करने के लिए कहा था। मध्यकालीन ढांचे के विध्वंस को अपराध बताते हुए शीर्ष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का आरोप बहाल रखने की सीबीआइ की अपील स्वीकार कर ली थी।

शीर्ष अदालत ने 12 फरवरी 2001 को आडवाणी और अन्य पर आपराधिक साजिश की धारा हटाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया था। अदालत का 2017 में फैसला आने से पहले 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा गिराने के मामले में दो अलग-अलग मुकदमे लखनऊ और रायबरेली में चल रहे थे। पहले मामले में अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ लखनऊ की अदालत में सुनवाई चल रही थी जबकि रायबरेली में चल रहा मामला आठ अति विशिष्ट लोगों से जुड़ा था।

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