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अंग्रेज चले गए लेकिन सराय भूपत में रेल का पहिया बंधता है जंजीर से

अंग्रेजों के जमाने में ट्रेन में पांच से छह बोगियां ही होती थीं। ऐसे में आंधी, तूफान अथवा भूकंप आने पर उसके लुढ़कने का खतरा बना रहता था। इस वजह से ट्रेन के एक पहिए को बांधने का नियम बना था।

Author इटावा | May 23, 2016 05:47 am
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का सराय भूपत रेलवे स्टेशन।

देश को आजाद हुए कितना वक्त हो गया है, यह बताने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि सब जानते हैं। आज भी अंग्रेजों के बनाए रेलवे नियमों का अगर कहीं पालन होता हुआ देखना है तो फिर उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सराय भूपत रेलवे स्टेशन आइए। यहां पर आपको देखने को मिलेगा कि ट्रेनों को सुरक्षित रखने के लिए बोगी में बाकायदा ताले लगा कर जंजीर से बांध कर रखा जाता है। इसके लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी भी लगाई जाती है। सराय भूपत रेलवे स्टेशन अधीक्षक मोहम्मद अहवाल कहते हैं कि पूर्व से चली आ रही व्यवस्था को वह अपनी मर्जी से खत्म नहीं कर सकते हैं। जब तक बोर्ड से आदेश नहीं मिलेगा तब तक नियम का पालन होता रहेगा।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में ट्रेन में पांच से छह बोगियां ही होती थीं। ऐसे में आंधी, तूफान अथवा भूकंप आने पर उसके लुढ़कने का खतरा बना रहता था। इस वजह से ट्रेन के एक पहिए को बांधने का नियम बना था। समय के साथ दूसरे स्टेशनों पर इस नियम की अनदेखी होने लगी। लेकिन सराय भूपत स्टेशन पर अभी भी इस नियम का पालन किया जाता है। हालांकि सच्चाई है कि यदि 120 बोगियों की भारी भरकम मालगाड़ी लुढ़कने लगे तो जंजीर उसे रोक नहीं पाएगी और टूट जाएगी।

दरअसल अंग्रेजों के शासनकाल में नियम बनाया गया कि अगर कोई ट्रेन एक दिन के लिए भी स्टेशन पर रुकती है तो उसके किसी एक पहिए को जंजीर से बांधकर उसमें ताला लगाकर सुरक्षित किया जाए। इस नियम का इटावा के भूपत स्टेशन पर आज भी पालन किया जा रहा है। इसलिए भूपत स्टेशन पर एक दिन के लिए भी रुकने वाली सवारी रेलगाड़ी या 120 बोगियों की आधा किलोमीटर लंबी मालगाड़ी के एक पहिए को बांध कर रखा जाता है। इसके तहत स्टेशन अधीक्षक या स्टेशन मास्टर की निगरानी में पोर्टर किसी एक पहिए को जंजीर से पटरियों से बांधकर ताला लगाता है। यही नहीं उस पहिए के दोनों ओर दो लकड़ी की गिट्टक भी लगाए जाते हैं।

इस काम को बाकायादा रेलवे के दस्तावेजों में इंद्राज भी किया जाता है और स्टेशन मास्टर कक्ष में रखे स्टेबल रजिस्टर में इसे दर्ज किया जाता है। जब ट्रेन रवाना होने को होती है तो लोको पायलट व गार्ड को ताला खोलकर ट्रेन सौंप दी जाती है। सरायभूपत रेलवे के स्टेशन पर इसके लिए पोर्टर दिनेश कुमार एवं राजेश कुमार की ड्यूटी लगती है। पोटर्रों का कहना है कि उन्हें स्टेशन अधीक्षक का आदेश मिला है। वर्षों से पहिए को एक जंजीर से बांध कर ताला लगाते आ रहे हैं। जाने के समय नियम से लिखत पढ़त पूरी कर ताला खोलकर ट्रेन को रवाना करते हैं।

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