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ट्रेन से टकराने पर बाघ की मौत, तीन माह में ट्रेन की चपेट में आए 3 बाघ

होशंगाबाद बुदनी और मिडघाट के बीच शुक्रवार शनिबार की रात को फिर ट्रेन की चपेट में आने से एक बाघ की मौत हो गई है। घ

Author नई दिल्ली | April 2, 2017 6:38 AM
होशंगाबाद बुदनी और मिडघाट के बीच शुक्रवार शनिबार की रात को फिर ट्रेन की चपेट में आने से एक बाघ की मौत हो गई है।

होशंगाबाद  बुदनी और मिडघाट के बीच शुक्रवार शनिबार की रात को फिर ट्रेन की चपेट में आने से  एक बाघ की मौत हो गई है। घटना की जानकारी रेलवे के कर्मचारियों ने वन विभाग को दी है। वन विभाग का अमला  घटना स्थल के।लिए रवाना हो गया है।  जानकारी के मुताविक बुदनी और मिडघाट पर डाउन ट्रेक पर पोल क्रमांक 175/8 के पास रात में बाघ ट्रेन की चपेट में आया था। घायल बाघ की घटना स्थल पर ही मौत हो गई है। दो महीने में तीन बाघो एक तेंदुआ की मौत  मिडघाट रेल सेक्शन में पिछले दो महीनो में तीन बाघ की मौत हो गई है। दो बाघ ट्रेन की ताकर से मरर गए। वाही एक बाघ ट्रेक के पास पानी के झोरे के पास मृत मिला था। यही एक तेंदुआ की।मौत भी ट्रेन से टकराने से हो चुकी है।  जंगल में ही बाघ की अंत्येष्ठि  घटना स्थल के करीब ही वन विभाग ने बाघ का पोस्ट मार्टम किया। इसके लिए चार डॉक्टरों की टी। बुलाई गई थी। इसके बाद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियो की मोजुदगी में बाघ मई अंत्येष्ठि की गई।

हालांकि इससे पहले भी साल की शुरुआत जनवरी माह में खबर आई थी कि मध्यप्रदेश में पिछले पांच साल में कुल 89 बाघों की मौत हुई है, जिनमें से 11 शावक थे। मध्यप्रदेश वन विभाग से प्राप्त आंकड़े बताते हैं, ‘‘वर्ष 2012 से वर्ष 2016 तक प्रदेश में 11 शावकों सहित कुल 89 बाघों की मौत हुई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 में 16 बाघों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2013 में 11, वर्ष 2014 में 14, वर्ष 2015 में 15 एवं वर्ष 2016 में 33 बाघों की मृत्यु हुई। वर्ष 2012 से वर्ष 2015 तक औसतन लगभग 14 बाघों की मौत हर साल हुई, जबकि वर्ष 2016 में 33 बाघों की मौत हुई, जो पिछले चार वर्षों की बाघों की औसतन मौत से तुलना करने पर दोगुनी से भी ज्यादा है। आंकड़ों के अनुसार जिन 89 बाघों की पिछले पांच वर्षों में मौत हुई, उनमें से 30 बाघ आपसी संघर्ष में मारे गये, जबकि 22 बाघों को शिकारियों ने शिकार, जहर या विद्युत करंट से मारा। बाकी बाघ बीमारी, वृद्धावस्था या अन्य कारणों से मरे।हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में बाघों के मरने के बाद भी वन्यजीव संरक्षकों एवं बाघों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह खुशखबरी है कि राज्य में बाघों एवं शावकों की संख्या पिछले पांच सालों में निरंतर बढ़ी है, क्योंकि जितने बाघ मरे, उनसे ज्यादा शावकों ने जन्म लिया है। मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक :वन्यप्राणी: जितेंद्र अग्रवाल ने ‘भाषा’ को बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा की गई बाघों की गणना के अनुसार, वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश में सिर्फ 257 बाघ थे, जबकि वर्ष 2014 में यह संख्या बढ़कर 308 हो गई और वर्तमान में प्रदेश में अनुमानित कुल 400 से अधिक बाघ एवं शावक हैं।

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