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गोवा में शराब पीने के बाद उपद्रव करते हैं बाहर से आने वाले पर्यटक

गोवा के पर्यटन मंत्री मनोहर अजगांवकर ने आज कहा कि गोवा आने वाले पर्यटक शराब पीने के बाद ‘‘उपद्रव’’ मचाते हैं और गोवा की संस्कृति को ‘‘नुकसान’’ पहुंचाते हैं।

Author पणजी | Published on: April 15, 2017 5:07 AM

गोवा के पर्यटन मंत्री मनोहर अजगांवकर ने शुक्रवार को कहा कि गोवा आने वाले पर्यटक शराब पीने के बाद ‘‘उपद्रव’’ मचाते हैं और गोवा की संस्कृति को ‘‘नुकसान’’ पहुंचाते हैं।
मंत्री ने कहा कि शराब गोवा की संस्कृति का हिस्सा रही है और स्थानीय लोग जानते हैं कि शराब पीकर कैसे व्यवहार करना है। अजगांवकर ने पणजी में एक समारोह के इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘शराब पीना गोवा की परंपरा रही है और इसे एक रात में नहीं रोका जा सकता। हम कह सकते हैं कि शराब हमारे गोवा का हिस्सा रही है। यदि किसी के पेट में दर्द हो तो भी दवा के रूप में गर्म शराब पी जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘गोवावासी जानते हैं कि शराब पीकर कैसे व्यवहार करना है लेकिन बाहर से आने वाले पर्यटक शराब पीकर उपद्रव मचाते हैं और हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाते है। यह रोका जाना चाहिए। गोवा में देर रात पार्टी करने के बारे में पर्यटन मंत्री ने कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय इस पर से रोक हटा लेता है तो सरकार ऐसी पार्टियों की अनुमति दे सकती है।
आपको बता दें कि इससे पहले मनोहर अजगांवकर ने कहा था कि गोवा में खानाबदोश जनजाति लमनी के सदस्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए क्योंकि वे गोवा की छवि को धूमिल कर रहे हैं और तटीय राज्य की संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं। लमनी मुख्य रूप से कर्नाटक की जनजाति है। अजगांवकर ने सोमवार को कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में मादक पदार्थ बेचे जा रहे हैं, उन्हें भी तत्काल निलंबित कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे मादक पदार्थों के व्यापार में लिप्त हैं।

अजगांवकर ने कहा, ‘जो बाहरी लोग गोवा की संस्कृति अपना सकते हैं, उन्हें रहने की इजाजत होनी चाहिए और शेष को राज्य से निकाल दिया जाना चाहिए। गोवा की संस्कृति को बनाए रखना जरूरी है। लमनी जनजाति के सदस्यों को गोवा नहीं आने देना चाहिए। उनकी वजह से गलत संदेश जा रहा है और गोवा की छवि खराब हो रही है। यह करना जरूरी है।’

मनोहर पर्रिकर ने पिछले महीने मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद कहा था कि गोवा की संस्कृति को बनाए रखना उनकी सरकार की नीति की प्राथमिकता रहेगी। अजगांवकर ने कहा कि अगर पुलिस चाहे तो मादक पदार्थों के व्यापार पर लगाम लगा सकती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर मादक पदार्थों के व्यापार में लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘हमारे अधिकारी जानते हैं कि मादक पदार्थ यहां कैसे आ रहे हैं अन्यथा यहां इसका व्यापार नहीं हो सकता। मैं मुख्यमंत्री से कहा रहा हूं कि जहां भी मादक पदार्थ पाए जाएं वहां के अधिकारी को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। यही इस समस्या का समाधान है।’

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