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राजस्थान: पर्यटन विकास निगम बंद होने के कगार पर

राजस्थान पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ अपने संस्थान की बुरी हालत के लिए सरकार की प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार मानता है। संघ के अध्यक्ष तेज सिंह राठौड़ का कहना है कि घाटे के नाम पर निगम की यूनिटें साजिश के तहत बंद की जा रही हैं।

Author March 28, 2018 5:16 AM
निगम ने बीते साल अपनी 15 यूनिटें बंद कर दीं।

पर्यटन के क्षेत्र में नई छंलाग लगाने वाले राजस्थान में अब पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बनाया गया पर्यटन विकास निगम बदहाली की तरफ बढ़ गया है। सरकार की लापरवाही के कारण भारी घाटे से जूझ रहा यह निगम अब बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। घाटे की वजह से सरकार इसके कई होटलों के साथ दूसरे प्रदेशों में स्थित पर्यटक केंद्रों को भी बंद करती जा रही है। निगम के पास प्रदेश के कई शहरों में बेशकीमती इलाकों में अपनी जमीन पर होटल है और अब इन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली गई है। पर्यटन विकास निगम के कई कर्मचारियों को तो घर बैठा दिया गया है और बहुत से कर्मियों को दूसरे विभागों में खपा दिया है। राज्य में देसी और विदेशी पर्यटकों की जबरदस्त आवाजाही के बावजूद सरकार अपने पर्यटन विकास निगम को नहीं संभाल पा रही है। निगम इन दिनों करोड़ों रुपए के घाटे से जूझ रहा है। घाटे के लिए सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है। प्रशासनिक कमजोरियों के कारण पर्यटन विकास निगम अपने मूल मकसद से भी भटक गया था। इस निगम को सरकार के आला अफसरों के साथ ही राजनेताओं ने अपनी ऐशगाह बना डाला था।

निगम ने बीते साल अपनी 15 यूनिटें बंद कर दीं। इससे पहले उसकी 27 यूनिटें सिर्फ घाटे के नाम पर बंद कर दी गई थीं। निगम ने घाटा कम करने के लिए अब तक 500 कर्मचारियों को दूसरे महकमों में समायोजित कर दिया है। इन कर्मियों को 2014 से ही दूसरे विभागों में भेजना शुरू कर दिया गया था। इन्हें भेजने के लिए निगम का तर्क था कि इससे इनके वेतन और अन्य भत्तों पर होने वाला करोड़ों रुपए का खर्च बचेगा। इससे घाटा तो कम नहीं हुआ उलटे और बढ़ता चला गया। निगम का राजस्व भी पांच साल में 88 करोड रुपए से घटकर 50 करोड़ रह गया। निगम का मौजूदा घाटा भी 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है। निगम की बुरी दशा का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि आगामी 31 मार्च को इसके अमदाबाद और कोलकाता दफ्तरों को बंद कर उन पर ताले लगाने का आदेश जारी कर दिया गया है। इससे पहले चेन्नई और मुंबई के कार्यालयों को बंद किया गया था। निगम का अब एकमात्र पर्यटक कार्यालय सिर्फ दिल्ली में ही बचेगा। इसे भी सुधार के नाम पर एक निजी कंपनी को सौंपने की रूपरेखा बना ली गई है। इसके बाद राज्य के बाहर राजस्थान पर्यटन निगम का कोई दफ्तर ही नहीं बचेगा। इन कार्यालयों के जरिये पर्यटक अपनी बुकिंग भी कराते थे जो अब बंद हो जाएगी। इनके बंद होने से अब पर्यटकों को सिर्फ ऑनलाइन बुकिंग पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।

राजस्थान पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ अपने संस्थान की बुरी हालत के लिए सरकार की प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार मानता है। संघ के अध्यक्ष तेज सिंह राठौड़ का कहना है कि घाटे के नाम पर निगम की यूनिटें साजिश के तहत बंद की जा रही हैं। इन्हें निजी हाथों में सौंपने के लिए ही निगम को बंद करवाया जा रहा है। उनका आरोप है कि इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। राठौड़ ने सारे मामलों की लोकायुक्त, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या एसआइटी से जांच करवाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि पहले निगम की आय के सारे स्रोत बंद किए गए। इसे घाटे में षड्यंत्र के तहत पहुंचाया गया। घाटे के लिए निगम के कर्मचारियों को बदनाम किया जा रहा है जबकि अफसरों और नेताओं की मिलीभगत के कारम ही बदहाल हालात हुई।

पर्यटन राज्य मंत्री कृष्णेंद्र कौर दीपा का कहना है कि पर्यटन विकास निगम में घाटा बढ़ता ही जा रहा है। इसकी कई यूनिटें रखरखाव में अभाव के चलते जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गई हैं। इसलिए इन्हें सुधार के लिए ही कुछ समय के लिए निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला किया गया है। निगम में कर्मचारियों की संख्या बेवजह ज्यादा होने से उन्हें दूसरे विभागों में शिफ्ट किया गया है। सरकार प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए कई कदम उठा रही है। इसके कारण प्रदेश में पर्यटकों की आवक बहुत ज्यादा हुई है और प्रदेश को कई पुरस्कार भी मिले हैं।

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