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राफ्टिंग, झरना, बंजी जंपिंग ही नहीं ऋषिकेश में घूमने लायक 10 प्वाइंट, जरूर जाएं

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही अब लोग ऐसी जगह छुट्टी बिताना जाना चाहेंगे जहां वो एन्जॉय कर सकें और साथ ही साथ ज्यादा खर्चा भी नहीं हो। ऐसे में ऋषिकेश है बेस्ट ऑप्शन, जानें क्यों ?

Author Updated: April 9, 2019 12:50 PM
ऋषिकेश में घूमने के लिए टॉप 10 प्लेसेस, फोटो सोर्स- जनसत्ता.कॉम्

अप्रैल की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अब हर कोई ऐसी जगह घूमने जाना चाहता है जहां न सिर्फ वो हल्की ठंडक के साथ आराम कर सके बल्कि ज्यादा पैसे भी न खर्च हों यानी ज्यादा महंगी जगह न हो। ऐसे में ऋषिकेश एक बेहतरीन ऑप्शन है उन सभी के लिए जो कम पैसों में घूमना चाहते हैं। ऐसे में जानें राफ्टिंग, झरना, बंजी जंपिंग के साथ ही ऋषिकेश में घूमने लायक 10 बेस्ट जगहें।

नीर गढ़ झरना: तपोवन (ऋषिकेश का एक एक इलाका) से करीब 13 किलोमीटर दूर है नीर गढ़ का झरना। इसे नीरगड्डू का झरना भी कहा जाता है। यहां जाने के लिए आपको एक टिकट लेना पड़ेगा जिसकी कीमत भारतीयों के लिए सिर्फ 30 रुपए हैं। नीर गढ़ का झरना जानें के लिए आपको करीब 1-2 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ेगा जो अपने आप में ही एक बेहतरीन अनुभव आपको देता है। ट्रैकिंग के रास्ते में आपको कुछ दुकानें भी मिलती हैं जिस पर चाय से लेकर जूस और हल्का फुल्का नाश्ता भी खा सकते हैं। ट्रैक करने के बाद आप पहुंचते हैं नीर गढ़ का झरना। नीर गढ़ का झरना एक प्राकृतिक स्विमिंग पूल जैसा है। जिसमें ऊपर झरने से पानी गिर रहा है और नीचे पर्यटक मस्ती से नहाते हैं। नीर गढ़ का झरना का काफी सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसकी गहराई अधिकतम 6 फीट तक ही है। हालांकि फिर भी बच्चों को किसी बड़े के साथ ही रहने की सलाह दी जाती है। यहां न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी सैलानी भी आपको एन्जॉय करते नजर आ जाएंगे।

लक्ष्मण झूला: गंगा नदी के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ता लक्ष्मण झूला यहां आने वाले सैलानियों के लिए एक खास आकर्षण रहता है। दरअसल यह एक ब्रिज है लेकिन यह रॉक सॉलिड नहीं है यानी जब आप इसपर सफर करोगे तो आपको झूले जैसा हिलता प्रतीत होगा। इसलिए इसे ब्रिज न कहकर झूला कहते हैं। लक्ष्मण झूले को 1939 में बनवाया गया था। बताया जाता है कि गंगा नदी को पार करने के लिए भगवान राम के भाई लक्ष्मण ने इस स्थान पर जूट का झूला बनवाया था। यह झूला करीब 450 फीट लंबा और गंगा से 70 फीट ऊंचाई पर है।

राम झूला: लक्ष्मण झूला की ही तरह राम झूला भी पर्यटकों को काफी भाता है। दरअसल यह दोनों झूले एक समान ही हैं। दोनों ही गंगा नदी के एक तट को दूसरे तट से जोड़ते हैं। दोनों झूलों पर ही न सिर्फ पैदल यात्री बल्कि दो पहिया वाहन लेकर भी गुजरा जा सकता है। राम झूला शिवानंद और स्वर्ग आश्रम के बीच बना है। इसलिए इसे शिवानंद झूला भी कहा जाता है। झूले के पास ही लोकल मार्केट है जहां पर लकड़ी का सामान, कपड़े, स्ट्रीट फूड और रूद्राक्ष आदि खरीदा जा सकता है।

नीलकंठ मंदिर: करीब 5500 फीट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर नीलकंठ मंदिर स्थित है। नीलकंठ मंदिर महादेव ( भगवान शिव) का मंदिर है। ऐसा बताया जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष पीया था। विष पीने के बाद से ही उनका कंठ नीला पड़ गया था। तभी से इस स्थान को नीलकंठ के नाम से जाना जाता है। तपोवन से यह मंदिर करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शहर से इस मंदिर का रास्ता भी बेहद खूबसूरत है। अधिकतर रास्ता गंगा के किनारे -किनारे ही जाता है। इसके साथ ही जब सड़क के रास्ते से सैलानी धीरे-धीरे पहड़ों पर चढ़ते जाते हैं तो उसका भी अनुभव बेहद खास होता है। रास्ते में आपको बंदर भी देखने को मिलते हैं।

त्रिवेणी घाट: ऋषिकेश में स्नान के लिए यह प्रमुख घाट है। यहां तड़के से ही श्रद्धालु पवित्र गंगा में डुबकी लगा देना शुरू कर देते हैं। बताया जाता है कि इस स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है और यहीं से गंगा मुड़ जाती है। इसके साथ ही शाम को यहां होने वाली आरती का नजारा भी बेहद मोहक होता है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर – ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला के पास ही है त्र्यंबकेश्वर मंदिर। इस मंदिर को तेरह मंजिल टेंपल भी कहते हैं। जहां बाकी मंदिर किसी एक खास देवी- देवता को समर्पित होते हैं तो वहीं त्र्यंबकेश्वर मंदिर में करीबन सभी देवी-देवता की पूजा होती है। बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना 12वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। महाशिवरात्रि और सावन में मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इस मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल से पर्यटकों को जो गंगा घाट का नजारा मिलता है उसे शब्दों में बखान करना आसान नहीं।

भरत मंदिर: भगवान राम के छोटे भाई भरत को समर्पित यह मंदिर त्रिवेणी घाट के निकट मौजूद है। बताया जाता है कि मंदिर का मूल रूप 1398 में तैमूर आक्रमण के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। हालांकि उस हमले के बाद भी कई चीजों को आज भी संरक्षित रखा गया है। मंदिर के अंदरूनी गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा एकल शालीग्राम पत्थर पर उकेरी गई है। आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा रखा गया श्रीयंत्र भी यहां देखा जा सकता है।

वशिष्ठ गुफा: ऋषिकेश से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वशिष्ठ गुफा। बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्ग पर स्थित वशिष्ट गुफा करीब 3 हजार साल पुरानी है। इस स्थान पर साधुओं को विश्राम और ध्यान लगाए देखे जा सकते हैं। ऐसे बताया जाता है कि यह स्थान भगवान राम का निवास स्थल भी रहा था। गुफा के अंदर के शिवलिंग भी स्थापित है।

ऋषिकुण्ड: यह एक पवित्र तालाब है जो ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के पास है। ऐसा बताया जाता है कि यमुना नदी की देवी ने सन्त कुब्ज की सज्जनता से प्रसन्न होकर इस तालाब को अपने पानी से भर दिया था। पर्यटक तालाब के पानी में भगवान राम और सीता को समर्पित प्राचीन रघुनाथ मन्दिर का प्रतिबिम्ब देख सकते हैं। ऋषिकुण्ड के पास ही दो प्रसिद्ध मन्दिर लक्षमण मन्दिर और भारत मन्दिर भी स्थित हैं।

गीता भवन: राम झूला पार करते ही पास ही में गीता भवन है जिसे 1950 ई. में जयदयाल गोयन्दकाजी ने बनवाया गया था। गीता भवन अपनी दर्शनीय दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां रामायण और महाभारत के चित्रों से सजी दीवारें इस स्थान को आकर्षण बनाती हैं। इसके साथ ही यहां एक आयुर्वेदिक डिस्पेन्सरी और गीताप्रेस गोरखपुर की एक शाखा भी है। प्रवचन और कीर्तन मंदिर की नियमित क्रियाएं हैं।

 

कैसे पहुंचे: पर्यटक ऋषिकेश में वायुमार्ग, रेलमार्ग और सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। एयरवे के लिए देहरादून के पास जौलीग्रांट एयरपोर्टपर पहुंचना होगा। जोकि ऋषिकेश से करीब 20 किलोमीटर दूर है। वहीं रेल मार्ग के लिए पर्यटक सीधे ऋषिकेश के ही स्टेशन पर आ सकता है। इसके साथ ही सड़क मार्ग के लिए दिल्ली के कश्मीरी गेट से ऋषिकेश के लिए सीधे बस जाती हैं जो करीब 5-7 घंटे का वक्त लेती हैं। सुविधानुसार व्यक्ति स्लीपर, एसी, सिटिंग आदी किसी भी बस का टिकट ले सकता है। वायुमार्ग, सड़क मार्ग और रेलवे के लिए टिकट ऑनलाइन भी बुक किए जा सकते हैं।

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