कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के खुलने के 13 दिनों के भीतर ही 63 किलोमीटर लंबे मार्ग पर गंभीर कमियां सामने आने के बाद , भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने समस्याओं के पूरी तरह से ठीक होने तक टोल वसूली बंद कर दी है। प्राधिकरण ने ठेकेदार, सलाहकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

एनएचएआई ने ठेकेदार पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का नोटिस जारी किया है जिससे कंपनी भविष्य में एनएचएआई परियोजनाओं के लिए बोली लगाने में अयोग्य हो जाएगी। इसके साथ ही, राजमार्ग प्रमुख और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राशि का 2% जुर्माना लगाने और तीन साल तक के लिए प्रतिबंध की कार्यवाही शुरू करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

तकनीकी जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ समिति का गठन

घटना की तकनीकी जांच करने के लिए आईआईटी खड़गपुर की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सुधार कार्य में लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और ठेकेदार को यह लागत वहन करनी होगी, एनएचएआई पर इसका कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। अधिकारी ने आगे कहा कि टोल राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई ठेकेदार से की जाएगी।

13 जुलाई को एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद, 26 जुलाई को उन्नाव के कोरारी इलाके में 64 किलोमीटर के पास लगभग 300 मीटर का स्लिपेज देखा गया। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई लोगों ने एनएचएआई और ठेकेदार से 4,200 करोड़ रुपये के एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। फिलहाल प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।

एजेंसी और इंजीनियर के खिलाफ एक्शन

ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के अलावा एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी के परियोजना प्रबंधक, स्वतंत्र इंजीनियर के टीम लीडर और रेजिडेंट इंजीनियर को परियोजना से हटा दिया है। उन्हें अगले दो वर्षों तक किसी भी राजमार्ग परियोजना में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर, थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी प्रतिबंध नोटिस जारी किया गया है।

अधिकारी ने बताया कि एनएचएआई के पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरासिया, जिनके कार्यकाल में निर्माण कार्य का एक बड़ा हिस्सा पूरा हुआ था और वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के खिलाफ परियोजना में कथित लापरवाही के आरोप में आरोप पत्र दायर किया जा रहा है। वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है।

प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट

एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी और मुख्य महाप्रबंधक गौतम विशाल चरण पहाड़ी ने कहा, “26 जुलाई को कानपुर- लखनऊ एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 64 के पास सड़क की सतह खिसकने का पता चला। घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया और प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी मूल्यांकन करने के निर्देश जारी किए गए। प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया है और एक्सप्रेसवे सुचारू रूप से चल रहा है।”

अधिकारी ने आगे कहा, “आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में सड़क विशेषज्ञों की एक टीम को विस्तृत तकनीकी जांच करने के लिए नियुक्त किया गया है। समिति घटना के मूल कारणों की पहचान करेगी और सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करेगी। साथ ही, एनएचएआई पूरी परियोजना के दौरान सड़क की स्थिति का लेजर प्रोफ़ाइलोमीटर आधारित मूल्यांकन कर रहा है।”

विपक्षी दलों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्से के वायरल वीडियो के बाद विपक्षी दलों ने भी जमकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं में से एक में निर्माण गुणवत्ता से समझौता कर रही है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “चलना कम, धंसना ज्यादा: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे! लागत: 4700 करोड़ रुपये।” उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी ट्विटर पर एक पोस्ट में सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे की यह हालत भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष और स्पष्ट प्रमाण है।

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