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आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की खैर नहीं, Terrorism को लेकर नाम लेकर किया जाए शर्मिंदा

भारत ने बुधवार को कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों का बाकायदा नाम लेकर उन्हें शर्मिन्दा किया जाए और इस बुराई से मुकाबले के लिए एकजुट प्रयास किए जाने चाहिए।
Author जयपुर | February 4, 2016 06:20 am
भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर। (फाइल फोटो)

भारत ने बुधवार को कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों का बाकायदा नाम लेकर उन्हें शर्मिन्दा किया जाए और इस बुराई से मुकाबले के लिए एकजुट प्रयास किए जाने चाहिए। विदेश सचिव एस. जयशंकर ने यहां सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तान का परोक्ष जिक्र करते हुए यह भी कहा कि कुछ देशों का यह मानना है कि बाहर आतंकवादी समूहों का समर्थन करके वे घरेलू स्तर पर शांति कायम पा सकते हैं जो कि उन देशों का ‘भ्रम’ है। उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया। उन्होंने साथ ही कहा कि पिछले महीने पठानकोट में वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले की जांच के संबंध में भारत, पाकिस्तान के साथ संपर्क में बना रहेगा।

जयशंकर ने यहां ‘आतंकवाद से मुकाबला सम्मेलन 2016’ में कहा, ‘आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों का बाकायदा नाम लेकर उन्हें शर्मिंदा किया जाना चाहिए।’ उन्होंने आतंकवाद से मुकाबले के लिए वृहत्तर अंतरराष्ट्रीय सहयोग कायम करने का आह्वान किया और साथ ही कहा कि आतंकवाद के तथाकथित पीड़ित तक अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद से लड़ने में सहयोग नहीं करते हैं।

जयशंकर ने कहा कि सरकारों को आतंकवादी हमलों की निंदा करने के लिए एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए एकजुट संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पठानकोट हमला होने के बाद से हम पाकिस्तान के संपर्क में हैं। हम अपने स्तर पर तथा एनएसए स्तर पर संपर्क में हैं क्योंकि केवल संपर्क में रह कर ही हम उम्मीद कर सकते हैं कि वे हमारे द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना पर प्रगति करेंगे।’

देश के पूर्वी भागों में आतंकवाद के मसले पर विदेश सचिव ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के मसले पर भारत सरकार की म्यांमा से बातचीत हुई है और भारत की चिंताओं पर अनुकूल प्रतिक्रिया मिली है। इसी संबंध में किए गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘म्यांमा के साथ हमारी कुछ समस्याएं हैं और हमारी उनसे कुछ बातचीत भी हुई है। पिछले कुछ महीनों में कुछ घटनाएं हुई हैं और पूर्व में सीमा पार से आतंकवादी हमला होने की आशंकाएं कम होंगी।’

जयशंकर ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक साथ मिलकर काम करने के महत्त्व को रेखांकित किया और बांग्लादेश के साथ सहयोग का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश के साथ हमारा इतिहास अच्छा उदाहरण है और आतंकवाद से मुकाबले की शानदार कहानी है। हमने व्यावहारिक, विधिक, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक रूप से काम करने की जरूरत है। यह (आतंकवाद) एक बड़ी चुनौती है।’ इस सत्र में भाग लेते हुए विदेश सचिव ने कहा कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए रासायनिक हथियार जैसे समझौते की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘विश्व में रासायनिक हथियारों और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर रोक है। आतंकवाद से भी इसी प्रकार मुकाबला क्यों नहीं किया जा सकता।’

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