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दिल्ली के कई सरकारी अस्पतालों में आज डॉक्टरों की हड़ताल, ओपीडी सेवा नहीं मिलेगी

7th Pay Commission: आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू नहीं होने के विरोध में दिल्ली सरकार के सभी मेडिकल कॉलेजों (जीटीबी, एमएएमसी, अंबेडकर, डीडीयू और संजय गांधी मेमोरियल) के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को हड़ताल रखी है। ऐसे में ओपीडी सेवा बाधित रहेगी।

Author December 19, 2018 3:49 PM
7th Pay Commission: तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

7th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू नहीं होने के विरोध में दिल्ली सरकार के सभी मेडिकल कॉलेजों (जीटीबी, एमएएमसी, अंबेडकर, डीडीयू और संजय गांधी मेमोरियल) के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को हड़ताल रखी है। ऐसे में ओपीडी सेवा बाधित रहेगी। हालांकि, डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो 20 दिसंबर से अस्पताल में अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी।

काफी समय से मांग कर रहे थे डॉक्टर: फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुमेध ने बताया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टर काफी समय से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से बार-बार मांग करने के बाद भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के पास हड़ताल के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

20 से अनिश्चितकालीन हड़ताल: डॉ. सुमेध ने बताया कि 19 दिसंबर को हड़ताल के बाद भी अगर प्रबंधन नहीं एक्टिव हुआ तो 20 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। उनका कहना है कि हड़ताल के दूसरे दिन निगम और केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल हो सकते हैं।

देर रात तक दिल्ली सचिवालय में बैठे रहे डॉक्टर:करीब डेढ़ साल से अपनी मांगों को लेकर परेशान डॉक्टरों ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में डेरा जमा लिया। स्वास्थ्य विभाग के सचिव कार्यालय में डॉक्टरों के साथ मीटिंग की गई। साथ ही, उनसे कहा गया कि वे हड़ताल वापस लें और अगले सप्ताह आकर इस पर चर्चा करें। डॉक्टरों ने दिलासा दिया कि अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को इस बारे में निर्देश दिए जाएंगे, लेकिन डॉक्टरों का कहना था कि उन्हें लिखित में कार्रवाई चाहिए। ऐसे में करीब 20 डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल देर रात तक सचिवालय में ही बैठा रहा।

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