टीएमसी के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को भेज दिया है। पश्चिम बंगाल में विधायकों की टूट के बाद टीएमसी को सांसदों के मामले में पहला झटका लगा है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से टीएमसी लगातार मुसीबतों से जूझ रही है। पार्टी के 58 विधायकों ने अपना गुट अलग बना लिया है और ऋतुब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना है।
रॉय का इस्तीफा टीएमसी के लिए बड़ा झटका है क्योंकि उन्हें पार्टी की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता है। रॉय ने इस्तीफा ऐसे वक्त में दिया जब ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की बेहद अहम बैठक में भाग हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं। उनके साथ पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी भी हैं।
क्यों दिया इस्तीफा?
इस्तीफे की वजह के बारे में पूछे जाने पर रॉय ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पार्टी में लंबे वक्त तक बने हालात की वजह से उन्हें यह फैसला लेना पड़ा। इस बारे में पूछे जाने पर कि क्या वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होंगे, रॉय ने कहा, ‘मैं 59 साल से राजनीति में हूं, इसलिए मैं इस बारे में आत्ममंथन और आत्मचिंतन के बाद सही वक्त पर फैसला लूंगा।’ उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि क्या टीएमसी का कोई और राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे रहा है।
अभिषेक बनर्जी के बढ़ते दखल से नाराजगी
दूसरी ओर, 58 बागी विधायकों का कहना है कि उनकी लड़ाई ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि वे ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पार्टी में बढ़ते दखल के खिलाफ हैं। बागी विधायकों का कहना है कि ममता बनर्जी उनकी सर्वोच्च नेता हैं और आगे भी रहेंगी।
संगठन में किया था फेरबदल
विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बीते दिनों संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया था। ममता बनर्जी ने टीएमसी में अपने वफादारों और पुराने नेताओं को जगह दी थी।
ममता ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा था लेकिन उनके साथ दो संयुक्त राष्ट्रीय सचिव को तैनात किया था। ममता बनर्जी ने ऐसा करके पार्टी के बागी नेताओं को संदेश देने की कोशिश की थी कि कोई भी फैसला संयुक्त रूप से लिया जाएगा न कि सिर्फ अभिषेक बनर्जी के द्वारा।
टीएमसी ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुब्रता बख्शी की जगह पूर्व मंत्री और ममता बनर्जी की वफादार चंद्रिमा भट्टाचार्य को यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
बहरहाल, सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में टीएमसी में सांसद भी बगावती रुख अपना सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो ममता बनर्जी कैसे इस तरह के मुश्किल राजनीतिक हालात का सामना करेंगी?
क्या ऋतब्रत-संदीपन साहा ने ममता के हाथों से छीना TMC का कंट्रोल?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी उलटफेर जारी है। टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा और बागी खेमे के नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मुलाकात कर 58 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
