पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील से अंडे हटाने को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अधिकांश बंगाली मांसाहारी हैं और सोया पसंद नहीं करते।
भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कोलकाता नगर निगम के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने वाले इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कान्शियसनेस को सौंपने और अंडों की जगह पर राजमा जैसे शाकाहारी खाना शुरू करने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी ने सरकार पर बंगाल में शाकाहारी संस्कृति थोपने का आरोप लगाया है।
सरकार ने अंडे को मेनू से हटाया
नई सरकार के तहत राज्य का पहला बजट पेश करते हुए, बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दास गुप्ता ने घोषणा की कि प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील की लागत 6.78 से बढ़ाकर 10 रुपये प्रति छात्र कर दी जाएगी और केएमसी क्षेत्र में एक पायलट परियोजना के तहत पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने का जिम्मा इस्कॉन को सौंपा जाएगा।
सरकार पर जबरन शाकाहार भोजन थोपने का आरोप
मिड-डे मील के शाकाहारी मेनू को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि अधिकतर बच्चों को सोया नहीं पसंद हैं और राज्य सरकार पर स्कूलों में शाकाहार भोजन थोपने का आरोप लगाया।
वजह क्या है?- महुआ मोइत्रा
उन्होंने कहा, “अंडे ‘क्लास A’ प्रोटीन होते हैं, यानी उनमें सभी जरूरी अमीनो एसिड होते हैं। सोया ही एकमात्र ऐसा नॉन-एनिमल प्रोटीन है जो ‘फर्स्ट क्लास’ माना जाता है। हमारे बच्चे सोया पसंद नहीं करते। जब हम स्कूलों में सोया खिलाते हैं, तो उन्हें यह पसंद नहीं आता। तो यहाँ आप अंडे की जगह कुछ और ला रहे हैं। तो वजह क्या है? अगर वजह सांस्कृतिक नहीं है और मकसद शाकाहार को बढ़ावा देना नहीं है, तो मुझे कोई एक ठोस वजह बताइए।”
विधानसभा की कैंटीन भी क्यों नहीं सौंप देते?
सांसद ने कहा बंगाल में बंगाली आबादी का 98 फीसदी हिस्सा मांसाहारी है और अंडे की तुलना में सोया में पोषक तत्वों की कमी होती है। आगे कहा, “आप पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपनी MLA कैंटीन को ISKCON को क्यों नहीं सौंप देते? आप राजमा-चावल क्यों नहीं खाते? और राजमा क्या है? क्या बंगालियों को पता है कि राजमा क्या होता है? मुझे भी दिल्ली जाने से पहले नहीं पता था कि राजमा क्या होता है। हमारे स्कूल जाने वाले 40 फीसदी बच्चे इसलिए स्कूल जाते हैं क्योंकि उन्हें दिन का एक पौष्टिक और गर्म खाना वहीं मिलता है तो यह सब बकवास है।”
आगे टीएमसी के बागियों से कहा, “मैं इन विधायकों और उन सभी 65 गद्दारों को सलाह दूँगी जो पार्टी छोड़कर चले गए हैं कि वे अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में वापस जाएं और लोगों को समझाएँ कि वे कैसे ऐसे जोकरों के साथ मिल गए हैं।”
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लगे झटके के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ऊबर नहीं रही है। उसके एक के बाद एक पुराने वफादार नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। टीएमसी अब सिर्फ पार्टी में टूट को लेकर मीडिया की सुर्खियों में है, बल्कि उसके अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बड़ा बयान दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
